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बिहार में कोरोना के 6 नये मरीज़, अब कुल संक्रमित 21 और 5387 लोग संदिग्ध

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बिहार राज्य में कोरोना वायरस पाॅजिटिव मरीजों की संख्या में मंगलवार को अचानक छह का इजाफा हो गया. पाॅजिटिव मरीजों में गोपालगंज के एक, गया के एक और चार सीवान जिले के पाये गये हैं. स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टि की है. इनमें राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीच्यूट आरएमआरआइ में दो और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान की जांच रिपोर्ट में चार पाजिटिव मरीज पाये गये हैं. इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना पाॅजिटिव की संख्या 16 से बढ़ कर 21 हो गयी है.

छह कोरोना पाॅजिटिव मरीजों में गोपालगंज और गया के एक-एक तथा सीवान जिले के चार पाये गये हैं. प्रदेश में कोरोना संक्रमण से पीड़ित जिलों में गया और गोपालगंज का भी नाम जुड़ गया है. पीड़ित जिलों की संख्या नौ पहुंच गयी है. खास यह कि गया जिले के मूल निवासी जिस युवक में कोरोना पाॅजिटिव पाया गया है, वह मुंगेर के नेशनल अस्पताल में आइसीयू का वरिष्ठ कर्मी है.

इसी अस्पताल में कोरोना से मृत युवक का प्रारंभिक इलाज किया गया था. इसके साथ मुंगेर जिले में पांच, पटना जिला में पांच, नालंदा जिला में एक, सीवान जिला में पांच, लखीसराय जिला में एक, बेगूसराय जिला में एक,सहरसा जिला में दो और गोपालगंज में एक नये मरीज की रिपोर्ट मिली है. जिनमें तीन मरीजों का इलाज के बाद जांच रिपोर्ट निगेटिव पाये जाने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया है.

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि मंगलवार को राज्य में कोरोना संक्रमण के कुल 208 संदिग्ध मरीजों की भर्ती करायी गयी है. अब तक राज्य में भर्ती संदिग्ध मरीजों की संख्या कुल 817 हो गयी है. इसमें से तीन को आइसीयू में भर्ती कराया गया है.

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने बताया कि राज्य में कुल 5387 लोगों को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. इसमें सारण क्षेत्र में सबसे अधिक लोग ऑब्जर्वेशन में रखे गये हैं जिसमें सीवान, सारण और गोपालगंज जिले शामिल हैं. उन्होंने बताया कि सर्वाधिक 3105 लोग सीवान जिले में ऑब्जर्वेशन में रखे गये हैं. ऑब्जर्वेशन में रखे गये लोगों की दूसरी बड़ी संख्या सारण जिले में है जहां पर अब तक 425 लोगों को निगरानी में रखा गया है.

गोपालगंज जिले में वर्तमान में 390 लोगों को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. इसके अलावा अररिया में (दो), औरंगाबाद में (55), सीतामढ़ी में (सात), सारण (425), भागलपुर (135), सुपौल (सात), मधुबनी (95), मधेपुरा (17), भोजपुर (81), गया (135), सीवान (3105), गोपालगंज (390), पटना (107), पूर्वी चंपारण (70), पश्चिम चंपारण (74), किशनगंज (25), मुजफ्फरपुर (173), रोहतास (13), समस्तीपुर (105), वैशाली (छह), दरभंगा (28), पूर्णिया (तीन), कटिहार (तीन), नवादा (43), बेगूसराय (सात) नालंदा (206), बक्सर (पांच), मुंगेर (18), अरवल (एक), जहानाबाद (20), कैमूर (12), बांका (चार), लखीसराय (एक), शिवहर (चार) और सहरसा (पांच) को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. इसमें से 327 लोगों ने अपना 14 दिनों का ऑब्जर्वेशन का समय पूरा कर लिया है.

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CRPC की धारा 144 का उल्लंघन करने पर IPC की धारा 188 के तहत FIR क्यों होती है

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हम देख रहे हैं कि केंद्र और तमाम राज्य सरकारें, किस प्रकार इस महामारी को लेकर गंभीर कदम उठाने पर मजबूर हो रही हैं। लॉकडाउन से लेकर दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CRPC) की धारा 144 लागू करने तक, सरकारों द्वारा इस वायरस के प्रकोप पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। इसी क्रम में हम ने देखा कि 23 मार्च से ही देश के तमाम जगहों पर CRPC धारा 144 को लागू कर दिया गया। मौजूदा लेख में हम यह जानेंगे कि आखिर क्यों, CRPC की धारा 144 का उल्लंघन करने पर स्वाभाविक परिणाम, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 धारा 188 के अंतर्गत मुक़दमे का चलना होता है। इसके अलावा, इनके मध्य क्या सम्बन्ध है, हम वह भी मौजूदा लेख में समझेंगे।

क्‍या है दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 144? 

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) की धारा 144 एक ‌‌डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सब-‌डी‌विजनल मजिस्ट्रेट या किसी अन्य कार्यकारी मजिस्ट्रेट को राज्य सरकार की ओर से किसी विशेष स्‍थान या क्षेत्र में एक व्यक्ति या आम जनता को “विशेष गतिविधि से दूर रहने” या “अपने कब्जे या प्रबंधन की किसी संपत्ति के संबंध में कोई आदेश लेने के लिए” आदेश जारी करने की शक्ति देती है। धारा 144 लगाने का आदेश “मजिस्ट्रेट” निम्न ‌स्थितियों पर रोक लगाने के लिए दे सकता है- 1-किसी भी व्यक्ति को कानूनी रूप से नियोजित करने में बाधा हो, परेशानी हो या चोट आने की आशंका हो। 2-मानव जीवन को, स्वास्‍थ्य और सुरक्षा पर संकट हो। 3- अशांति, दंगा या उत्पीड़न की आशंका हो। यह आदेश एक विशेष व्यक्ति, व्यक्ति के समूह या आम जनता के खिलाफ पारित किया जा सकता है। एक-पक्षीय (ex-parte) आदेश भी पारित किया जा सकता है। गौरतलब है कि *जगदीश्वरानन्द बनाम पुलिस कमिशनर* 1983 Cri.LJ 1872 , के मामले में यह कहा गया था कि धारा 144 का सार परिस्थिति की तात्कालिकता है एवं इसके प्रभाव को कुछ हानिकारक घटनाओं को रोकने में सक्षम होने की संभावना एवं सक्षमता से समझा जा सकता है। 

क्या CRPC की धारा 144 का दूसरा नाम कर्फ्यू है

हाल के कुछ मामले जैसा कि हम जानते ही हैं कि देश में कोरोना-वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते लॉकडाउन की घोषणा की है। वहीं कुछ ऐसे भी राज्य हैं जहाँ सरकार द्वारा सीआरपीसी की धारा 144 के तहत ‘कर्फ्यू’ (आम तौर पर धारा 144 को ‘कर्फ्यू’ के रूप में समझा जाता है, पर इस शब्द का इस धारा के सम्बन्ध में इस्तेमाल एकदम सटीक नहीं) लगाने के आदेश जारी किये गए हैं। 

CRPC की धारा 144 और IPC की धारा 188 के बीच क्या रिश्ता है

अब इस लेख में हम सीआरपीसी की धारा 144 और आईपीसी की धारा 188 के बीच के समबन्ध के बारे में बात करने से पहले यह जान लेते हैं कि इन राज्यों द्वारा, धारा 144 लगाते हुए आखिर क्या आदेश दिए गए हैं? अब चूँकि हर एक राज्य द्वारा धारा 144, सीआरपीसी के अंतर्गत जारी आदेश पर हम यहाँ चर्चा तो नहीं कर सकते, इसलिए हम केवल ‘दिल्ली पुलिस’ द्वारा धारा 144 के अंतर्गत जारी आदेश की बातों को पढेंगे। अमूमन यही आदेश (थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ), हर राज्य सरकार (दिल्ली में दिल्ली पुलिस) द्वारा जारी किये गए हैं। तो चलिए उदाहरण के लिए देखते हैं ‘दिल्ली पुलिस’ द्वारा धारा 144, सीआरपीसी के अंतर्गत जारी किया गया आदेश क्या कहता है:-  ”COVID-19 के प्रसार को कम करने के लिए, दिल्ली पुलिस धारा 144 दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 लागू करती है, और दिल्ली में सार्वजनिक स्वास्थ्य, सार्वजनिक सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए निम्न निषेधात्मक आदेश देती है  प्रदर्शनों, जुलूसों, विरोध प्रदर्शनों आदि के लिए किसी भी प्रकार की सभा निषिद्ध है।  
किसी भी सामाजिक/सांस्कृतिक/राजनीतिक/धार्मिक/शैक्षणिक/खेल/संगोष्ठी/सम्मेलनों का आयोजन निषिद्ध है। * साप्ताहिक बाजारों (सब्जियों, फलों और आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर), संगीत, प्रदर्शनियों आदि का संगठन निषिद्ध है। विभिन्न निजी टूर ऑपरेटरों द्वारा संचालित निर्देशित समूह पर्यटन निषिद्ध हैं।  COVID-19 के साथ ग्रसित/संदिग्ध हर एक व्यक्ति इसकी रोकथाम/उपचार के लिए उपाय करेगा अर्थात् घर करन्तीन/संस्था करन्तीन/अलगाव या ऐसा कोई व्यक्ति, निगरानी कर्मियों के निर्देशों का पालन करने के लिए सहयोग करेगा या सहायता प्रदान करेगा। यहाँ इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि इन आदेशों का पालन किया जाना अनिवार्य होता है। 
जैसा कि हमने ऊपर समझा, इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि कई बार इन आदेशों/आदेश को, लोगों को व्यक्तिगत रूप से निर्देशित कर पाना संभव नहीं होता है। ऐसे मामलों में इन्हें  एक पक्षीय आदेश के तौर पर निर्देशित कर दिया जाता है (अधिसूचना के रूप में या अन्यथा)। गौरतलब है कि ऐसा आदेश, किसी खास व्यक्ति, आम जनता या किसी खास व्यक्तियों के समूह को निर्देशित हो सकता है। ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे यह आदेश सभी के संज्ञान में आ जाये और इसका उल्लंघन न किया जाये। यदि ऐसा नहीं किया जायेगा तो उल्लंघन के मामले में किसी पर यह कहकर अभियोग नहीं चलाया जा सकेगा कि उसने लोक सेवक के आदेश का उल्लंघन किया, क्योंकि ऐसे आदेश को अधिसूचित ही नहीं किया गया था, अर्थात आम जनता, किसी खास व्यक्ति या समूह को निर्देशित ही नहीं किया गया था। 
इसके अलावा, जैसे कि हमने बात की, यह आदेश ‌‌डि‌स्टिक्ट मजिस्ट्रेट, सब-‌डी‌विजनल मजिस्ट्रेट या किसी अन्य कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किये जाते हैं (दिल्ली में यह आदेश कमिश्नर ऑफ़ पुलिस द्वारा जारी किया गया है), जोकि आईपीसी की धारा 188 के अंतर्गत भी, एक लोक-सेवक होते हैं और इसी के चलते, ऐसे आदेशों की अवज्ञा करने वाले व्यक्ति को इस धारा के अंतर्गत दंड भुगतना पड़ सकता है। 

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 188 संक्षेप में 

हालाँकि पिछले एक लेख मे हम यह समझ चुके हैं कि इस धारा के अंतर्गत लोक सेवक (Public Servant) द्वारा प्रख्यापित (Promulgated) किसी आदेश (Order) की अवज्ञा (Disobedience) करने वाले व्यक्ति को दण्डित करने का प्रावधान किया गया है। 
जानिए क्या कहती है आईपीसी की धारा 188 क्या हो सकते हैंं प्रशासन के आदेश की अवज्ञा के परिणामऐसे आदेश के लिए यह जरुरी है कि यह आदेश एक लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित होना चाहिए (जैसा कि धारा 144, सीआरपीसी के मामले में होता है)। ऐसा लोक सेवक, वह आदेश प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त होना चाहिए। धारा 188 के तहत जिसके खिलाफ मुकदमा चलना है, उस अभियुक्त को उस आदेश के बारे में जानकारी होनी चाहिए थी। और अभियुक्त द्वारा ऐसे आदेश की अवज्ञा होनी चाहिए। इसके अलावा, इस धारा के अंतर्गत यह भी बेहद जरुरी है कि ऐसी अवज्ञा के चलते या तो, (अ) विधिपूर्वक नियुक्त व्यक्तियों को बाधा (obstruction), क्षोभ (annoyance) या क्षति (injury), अथवा बाधा, क्षोभ या क्षति का जोखिम (risk) कारित की जाये, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखने वाला कोई कार्य किया जाये; या (ब) अगर ऐसी अवज्ञा, मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को संकट कारित करे, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखती हो, या उपद्रव या दंगा कारित करती हो, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखती हो, केवल तब ही इस धारा के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान/यह प्रावधान हरकत में आएगा *(लक्ष्मी देवी बनाम एम्परर 1930 ILR 58 Cal। 971)*। 
यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि (अ) और (ब) दोनों ही मामलों के लिए, अलग-अलग सजाओं का प्रावधान है, जिसे आप विस्तार से समझने के लिए ऊपर लिंक से जुड़ा हुआ लेख पढ़ सकते हैं। धारा 188 आईपीसी एवं धारा 144 सीआरपीसी यह बहुत ही स्वाभाविक है कि यदि धारा 144, सीआरपीसी के तहत एक लोक-सेवक द्वारा एक आदेश जारी किया जाता है, तो ऐसे आदेश की अवज्ञा करने वाले व्यक्ति को धारा 188, आईपीसी के तहत दण्ड का सामना करना पड़ सकता है। कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि धारा 144, सीआरपीसी का आदेश जारी करते हुए ही इस बात का उल्लेख उस आदेश/अधिसूचना में मिल जाता है कि उन आदेशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को धारा 188, आईपीसी के तहत दण्ड का सामना करना पड़ेगा। हालाँकि, जिन मामलों में ऐसा नहीं लिखा होता है, वहां यह स्वाभाविक है कि चूँकि एक लोक-सेवक द्वारा ही धारा 144, सीआरपीसी के तहत आदेश जारी किये जाते हैं, इसलिए यदि उन आदेशो की अवज्ञा होगी तो धारा 188, आईपीसी के तहत मामला बनेगा, क्योंकि धारा 188, आईपीसी लोक सेवक के आदेशों की अवज्ञा से सम्बंधित है। 
इसके अलावा, जैसा कि *राम समुझ बनाम राज्य*।। AIR 1963 All. 579 के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा कहा गया था, धारा 188, आईपीसी के अंतर्गत धारा 144, सीआरपीसी के तहत पारित किये गए आदेश शामिल होंगे। हालाँकि, पटना उच्च न्यायालय द्वारा मुंद्रिका देवी एवं अन्य बनाम बिहार राज्य Criminal Miscellaneous No. 28008 of 2013 के मामले में यह साफ़ तौर पर कहा गया था कि जहाँ दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा, 144 के अंतर्गत कार्यवाही कानून के अंतर्गत उचित नहीं थी, वहां भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 188 के अंतर्गत अभियुक्तों के खिलाफ शुरू की गयी कार्यवाही भी बनाये रखने के योग्य नहीं होगी। अंत में, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि जैसा राज्य बनाम श्रीमती तुगला, AIR 1955 All. 423 के मामले में कहा गया है, धारा 188, आईपीसी के अंतर्गत किसी को दोषी तब तक नहीं करार दिया जा सकता है, जब तक कि लोकसेवक के आदेश की अवज्ञा के परिणाम, सकारात्मक रूप से साबित न कर दिए जाएँ।।

कोरोना से मृत मुंगेर के सैफ के संपर्क में आने वालों में अब कोरोना के लक्षण

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सैफ के संपर्क में आने वालों में अब कोरोना के लक्षण मिल रहे हैं। एम्बुलेंस चालक और पटना मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर से लेकर अब तक 70 लोगों को चिन्हित किया गया है। मुंगेर से लेकर पटना तक सैफ के संपर्क में आने वालों की पड़ताल की जा रही है। इसमें पटना के साथ मुंगेर के सिविल सर्जन कार्यालय से टीम गठित की गई है, जो  लगातार ऐसे लोगों को चिन्हित करने में जुटी है। 

दहशत में है एम्बुलेंस चालक
सैफ को एम्स से मुंगेर ले जाने वाला एम्बुलेंस चालक काफी दहशत में है। सैफ की मौत के बाद जब उसकी जांच रिपोर्ट कोरोना से संक्रमित आई तो स्वास्थ्य विभाग ने सबसे पहले एम्बुलेंस चालक को ही आइसोलेट किया था। हालांकि शुरुआती दौर में चालक में कोई संदिग्ध लक्षण नहीं मिला था। सिविल सर्जन के आदेश पर सावधानी को लेकर  उसे होम कोरेंटाइन में रखा गया था, लेकिन दो दिनों से उसे सर्दी व अन्य शिकायत मिलनी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि बुधवार को उसे तकलीफ कुछ बढ़ी, जिसके  बाद उसकी बेचैनी बढ़ गई। वह सैफ की मौत के बाद से ही डरा है और उसे लगता है कि वह भी नहीं बचेगा। गुरुवार को सिविल सर्जन ने एम्बुलेंस चालक की जांच के लिए  डॉक्टरों को निर्देश दिया है। आरएमआरआई में उसका नमूना लेकर जांच के लिए भेजने को कहा गया है। 

डॉक्टर को कर दिया गया है अलग 
कोरोना संक्रमित सैफ की डायलिसिस मुंगेर में हुई थी। इसके बाद परिजन उसे लेकर पटना मेडिकल कॉलेज आए थे। पटना मेडिकल कॉलेज में उसका पर्चा कटाया गया था और फिर सैफ ने ही एक डॉक्टर को अपने हाथ से पर्चा थमाया था। पीएमसीएच में भीड़ के कारण सैफ को अस्पताल से वापस कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि पटना मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ के कारण सैफ को भर्ती करने से इनकार कर दिया गया था। पर्चा लेकर डॉक्टर ने सैफ से उसकी समस्या को लेकर बात करने के साथ जांच पड़ताल भी की थी। ऐसे में आशंका डॉक्टर के भी संक्रमित होने को लेकर है। 

डॉक्टर में हुआ संक्रमण तो संकट में होगी मरीजों की जान 
पटना मेडिकल कॉलेज के जिस डॉक्टर के बारे में संक्रमण की आशंका जताई जा रही है, वह यूरोलॉजी विभाग के बताए जा रहे हैं। अगर उनके अंदर संक्रमण की पुष्टि हुई तो कई मरीजों की जान सांसत में होगी, क्योंकि संबंधित डॉक्टर ने सैफ की रिपोर्ट आने के बाद तक मरीजों का इलाज किया है। दर्जनों मरीजों का परीक्षण करने के साथ उन्हें दवा दी गई। हालांकि जब तक डॉक्टर की जांच नहीं हो जाती है, इस मामले में कोई बड़ा निणर्य नहीं लिया जा रहा है। डॉक्टर को मेडिकल कॉलेज से अलग रहने को कहा गया है। 

संदिग्ध की 70 से बढ़ सकती है संख्या 
सिविल सर्जन कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक सैफ के संपर्क में आने वालों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। अब तक 70 लोगों को चिन्हित किया गया है, जो सैफ के सीधे संपर्क में आए हैं। अब इन 70 लोगों की जांच के बाद इसमें पॉजिटिव आए लोगों के संपर्क में आने वालों की हिस्ट्री खंगाली जाएगी। बताया जा रहा है ये संख्या हजारों में पहुंच सकती है। हालांकि परिवार के सदस्यों के साथ अन्य करीबी लोगों की जांच कराई गई थी, जिसमें दो में सक्रमण होना पाया गया था। इस मामले में पूरा स्वास्थ्य महकमा जांच में जुटा हुआ है और इस चेन को तोड़ने में लगा है, जो सैफ के कारण बनी हुई है। सैफ 13 मार्च को कतर से लौटा था। वह किडनी का मरीज था और इसपर उसे कोरोना का संक्रमण भी हो गया। मुंगेर में इलाज कराने के साथ वह पटना के कई बड़े अस्पतालों में भटका, फिर एम्स में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार को उसकी मौत हो गई।

और पढिये – कोरोना क्या है, कोरोना की स्टेज क्या होती हैं? बारीकी से समझिए

पटना और सिवान में मिले कोरोना पॉजिटिव के 2 नए केस

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बिहार में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। शुक्रावर को सिवान और पटना में एक-एक नए मरीज मिलने से हडकंप मच गया। अब राज्य कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या नौ हो गई है।

आरएमआरआई के निदेशक डॉ प्रदीप दास ने बताया है कि गुरुवार को दो कोरोना संदिग्ध की रिपोर्ट सस्पेक्टेड की श्रेणी में थीए उसे कंफर्म कर लिया गया है। दोनों मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव है। दोनों मरीज एनएमसीएच के आईडीएच में भर्ती हैं। इस तरह से पटना एनएमसीएच के संक्रामक रोग अस्पताल में कोरोना वायरस के 5 पॉजिटिव मरीज़ भर्ती हैं। खेमनीचक स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज एम्स में कोरोना पॉजिटिव मृतक युवक के संपर्क में आए एक और अस्पताल कर्मी की रिपोर्ट पॉजिटिव प्राप्त हुई है तो वहीं दूसरी पॉजिटिव रिपोर्ट सीवान जिले के एक युवक की आई है जो ओमान से लौटा था।

कोरोना क्या है, कोरोना की स्टेज क्या होती हैं? बारीकी से समझिए

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(नीचे नाम एवं पद काल्पनिक है)

पहली स्टेज 1⃣

विदेश से दिनेश आया। एयरपोर्ट पर उसको बुखार नहीं था। उसको घर जाने दिया गया। पर उससे एयरपोर्ट पर एक शपथ पत्र भरवाया गया कि वह 14 दिन तक अपने घर में कैद रहेगा। और बुखार आदि आने पर इस नम्बर पर सम्पर्क करेगा।
घर जाकर उसने शपथ पत्र की शर्तों का पालन किया।
वह घर में कैद रहा।
यहां तक कि उसने घर के सदस्यों से भी दूरी बनाए रखी।

दिनेश की मम्मी ने कहा कि अरे तुझे कुछ नहीं हुआ। अलग थलग मत रह। इतने दिन बाद घर का खाना मिलेगा तुझे, आजा किचिन में… मैं गरम गरम् परोस दूं।
दिनेश ने मना कर दिया।

अगली सुबह मम्मी ने फिर वही बात कही। इस बार दिनेश को गुस्सा आ गया। उसने मम्मी को चिल्ला दिया। मम्मी की आंख में आंसू झलक आये। मम्मी बुरा मान गयीं।

दिनेश ने सबसे अलग थलग रहना चालू रखा।

6-7वें दिन दिनेश को बुखार सर्दी खांसी जैसे लक्षण आने लगे। दिनेश ने हेल्पलाइन पर फोन लगाया। कोरोना टेस्ट किया गया। वह पॉजिटिव निकला।
उसके घर वालों का भी टेस्ट किया गया। वह सभी नेगेटिव निकले।
पड़ोस की 1 किमी की परिधि में सबसे पूछताछ की गई। ऐसे सब लोगों का टेस्ट भी किया गया। सबने कहा कि नवांकुर को किसी ने घर से बाहर निकलते नही देखा।
चूंकि उसने अपने आप को अच्छे से आइसोलेट किया था इसीलिए उसने किसी और को कोरोना नहीं फैलाया।
दिनेश जवान था। कोरोना के लक्षण बहुत मामूली थे। बस बुखार सर्दी खांसी बदन दर्द आदि हुआ। 7 दिन के ट्रीटमेंट के बाद वह बिल्कुल ठीक होकर अस्पताल से छुट्टी पाकर घर आ गया।

जो मम्मी कल बुरा मान गईं थीं, वो आज शुक्र मना रहीं हैं कि घर भर को कोरोना नहीं हुआ।

यह पहली स्टेज जहां सिर्फ विदेश से आये आदमी में कोरोना है। उसने किसी दूसरे को यह नहीं दिया।


स्टेज 2- राजू में कोरोना पॉजिटिव निकला।
उससे उसकी पिछले दिनों की सारी जानकारी पूछी गई। उस जानकारी से पता चला कि वह विदेश नहीं गया था। पर वह एक ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आया है जो हाल ही में विदेश होकर आया है। वह परसों गहने खरीदने के लिए एक ज्वेलर्स पर गया था। वहां के सेठजी हाल ही में विदेश घूमकर लौटे थे।

सेठजी विदेश से घूमकर आये थे।उनको एयरपोर्ट पर बुखार नहीं था। इसी कारण उनको घर जाने दिया गया। पर उनसे शपथ पत्र भरवा लिया गया, कि वह अगले 14 दिन एकदम अकेले रहेंगे और घर से बाहर नहीं निकलेंगे। घर वालों से भी दूर रहेंगे।
विदेश से आये इस सेठ ने एयरपोर्ट पर भरे गए उस शपथ पत्र की धज्जियां उड़ाईं।
घर में वह सबसे मिला।
शाम को अपनी पसंदीदा सब्जी खाई।
और अगले दिन अपनी ज्वेलेरी दुकान पर जा बैठा। (पागल हो क्या! सीजन का टेम है, लाखों की बिक्री है, ज्वेलर साब अपनी दुकान बंद थोड़े न करेंगे)

6वें दिन ज्वेलर को बुखार आया। उसके घर वालों को भी बुखार आया। घर वालों में बूढ़ी मां भी थी।
सबकी जांच हुई। जांच में सब पॉजिटिव निकले।

यानि विदेश से आया आदमी खुद पॉजिटिव।
फिर उसने घर वालों को भी पॉजिटिव कर दिया।

इसके अलावा वह दुकान में 450 लोगों के सम्पर्क में आया। जैसे नौकर चाकर, ग्राहक आदि।
उनमें से एक ग्राहक राजू था।

सब 450 लोगों का चेकअप हो रहा है। अगर उनमें किसी में पॉजिटिव आया तो भी यह सेकंड स्टेज है।

डर यह है कि इन 450 में से हर आदमी न जाने कहाँ कहाँ गया होगा।

कुल मिलाकर स्टेज 2 यानी कि जिस आदमी में कोरोना पोजिटिव आया है, वह विदेश नहीं गया था। पर वह एक ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आया है जो हाल ही में विदेश होकर आया है।


स्टेज 3

मनोज को सर्दी खांसी बुखार की वजह से अस्पताल में भर्ती किया, वहां उसका कोरोना पॉजिटिव आया।
पर मनोज न तो कभी विदेश गया था।
न ही वह किसी ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आया है जो हाल ही में विदेश होकर आया है।

यानि हमें अब वह स्रोत नहीं पता कि मनोज को कोरोना आखिर लगा कहाँ से??

स्टेज 1 में आदमी खुद विदेश से आया था।

स्टेज 2 में पता था कि स्रोत सेठजी हैं। हमने सेठजी और उनके सम्पर्क में आये हर आदमी का टेस्ट किया और उनको 14 दिन के लिए अलग थलग कर दिया।

स्टेज 3 में आपको स्रोत ही नहीं पता।

स्रोत नहीं पता तो हम स्रोत को पकड़ नहीं सकते। उसको अलग थलग नहीं कर सकते।
वह स्रोत न जाने कहाँ होगा और अनजाने में ही कितने सारे लोगों को इन्फेक्ट कर देगा।

स्टेज 3 बनेगी कैसे?

सेठजी जिन 450 लोगों के सम्पर्क में आये। जैसे ही सेठजी के पॉजिटिव होने की खबर फैली, तो उनके सभी ग्राहक,नौकर नौकरानी, घर के पड़ोसी, दुकान के पड़ोसी, दूध वाला, बर्तन वाली, चाय वाला….सब अस्पताल को दौड़े।
सब लोग कुल मिलाकर 440 थे।
10 लोग अभी भी नहीं मिले।
पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम उनको ढूंढ रही है।
उन 10 में से अगर कोई किसी मंदिर आदि में घुस गया तब तो यह वायरस खूब फैलेगा।
यही स्टेज 3 है जहां आपको स्रोत नहीं पता।

स्टेज 3 का उपाय
14 दिन का lockdown
कर्फ्यू लगा दो।
शहर को 14 दिन एकदम तालाबंदी कर दो।
किसी को बाहर न निकलने दो।

इस तालाबंदी से क्या होगा??

हर आदमी घर में बंद है।
जो आदमी किसी संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में नहीं आया है तो वह सुरक्षित है।
जो अज्ञात स्रोत है, वह भी अपने घर में बंद है। जब वह बीमार पड़ेगा, तो वह अस्पताल में पहुंचेगा। और हमें पता चल जाएगा कि अज्ञात स्रोत यही है।

हो सकता है कि इस अज्ञात श्रोत ने अपने घर के 4 लोग और संक्रमित कर दिए हैं, पर बाकी का पूरा शहर बच गया।

अगर LOCKDOWN न होता। तो वह स्रोत पकड़ में नहीं आता। और वह ऐसे हजारों लोगों में कोरोना फैला देता। फिर यह हजार अज्ञात लोग लाखों में इसको फैला देते। इसीलिए lockdown से पूरा शहर बच गया और अज्ञात स्रोत पकड़ में आ गया।

क्या करें कि स्टेज 2, स्टेज 3 में न बदले।
Early lockdown यानी स्टेज 3 आने से पहले ही तालाबन्दी कर दो।
यह lockdown 14 दिन से कम का होगा।

उदाहरण के लिए
सेठजी एयरपोर्ट से निकले
उनने धज्जियां उड़ाईं।
घर भर को कोरोना दे दिया।
सुबह उठकर दुकान खोलने गए।
(गजब आदमी हो यार! सीजन का टेम है, लाखों की बिक्री है, अपनी दुकान बंद कैसें कर लें)

पर चूंकि तालाबंदी है।
तो पुलिस वाले सेठजी की तरफ डंडा लेकर दौड़े।
डंडा देख सेठजी शटर लटकाकर भागे।

अब चूंकि मार्किट बन्द है।
तो 450 ग्राहक भी नहीं आये।
सभी बच गए।
राजू भी बच गया।
बस सेठजी के परिवार को कोरोना हुआ।
6वें 7वें दिन तक कोरोना के लक्षण आ जाते हैं। विदेश से लौटे लोगों में लक्षण आ जाये तो उनको अस्पताल पहुंचा दिया जायेगा। और नहीं आये तो इसका मतलब वो कोरोना नेगेटिव हैं।

और पढिये – कोरोना से मृत मुंगेर के सैफ के संपर्क में आने वालों में अब कोरोना के लक्षण