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बिहार में पिछले 24 घंटे में नहीं मिला कोई पॉजिटिव केस – LIVE कोरोना वायरस – बिहार में ताज़ा स्थिति

बिहार में पिछले 24 घंटे में नहीं मिला कोई पॉजिटिव केस

पटना के राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट,पटना, इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस,पटना और लहेरियासराय के दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कुल 3037 सैंपलों की जांच हो चुकी है. इनमें अब तक 32 सैंपल पॉजिटिव पाये गये हैं. रविवार को दोपहर तक राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, पटना में 236 सैंपलों की जांच की गयी. इसमें किसी भी सैंपल में पॉजिटिव केस नहीं मिला है. हालांकि, तीन जांच केंद्रों को मिलाकर अब भी 706 सैंपलों की जांच लंबित है. वहीं, रविवार को पीएमसीएच से कोरोना जांच के लिए कुछ छह सैंपल आरएमआरआइ भेजे गये हैं, जिनकी रिपोर्ट सोमवार को आयेगी. जानकारी के अनुसार छह सैंपल भेजने के अलावा एक संदिग्ध को पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है, जिसकी जांच सोमवार को पीएमसीएच खुद अपने स्तर से शुरू करेगा.

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बिहार में पॉजिटिव मरीजों की जिलावार संख्या

आरएमआरआइ : जांच -2555 सैंपल, पॉजिटिव- 20, लंबित जांच-350 सैंपल

आइजीआइएमएस : जांच -418 सैंपल, पॉजिटिव-12, लंबित जांच-300 सैंपल

डीएमसीएच : जांच- 64 सैंपल, पॉजिटिव-शून्य, लंबित जांच-56 सैंपल

मुंगेर 07

सीवान 06

पटना 05

गया 05

गोपालंगज 03

नालंदा 02

बेगूसराय 01

सारण 01

लखीसराय 01

भागलपुर 01

गौरतलब है कि बिहार में कोरोना पॉजिटिव एक मरीज की मौत हो चुकी है, वहीं चार कोरोना पॉजिटिव मरीज स्वस्थ्य होकर अपने घरों को लौट चुके हैं.

बिहार में लॉकडाउन का उल्लघंन करने पर 36 गिरफ्तार

लॉकडाउन के दौरान इसका उल्लंघन करने वालों पर रविवार को भी कार्रवाई जारी रही. 39 लोगों पर एफआइआर की गयी और 36 को गिरफ्तार किया गया. 660 वाहन जब्त किये गये और 23 लाख 48 हजार 300 रुपये का जुर्माना भी वसूला गया. शनिवार को 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया. 36 एफआइआर कर 623 वाहनों को जब्त किया था. 16 लाख 83 हजार 700 रुपये का जुर्माना भी लिया गया था.

कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आये छह लोगों को किया गया क्वारेंटिन

लंदन की यात्रा कर लौटे व्यक्ति के 21 मार्च को शहर के नारायण इंद्रासन होटल में ठहरने और उसके कोरोना पॉजिटिव पाये जाने बाद होटल को सील कर दिया गया है. उसे अब सैनिटाइज किया जायेगा. जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी ट्रैवल हिस्ट्री तथा संपर्क में आने वाले व्यक्तियों की सूची अविलंब तैयार करने का भी निर्देश दिया है. कोरोना पाजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आने वाले छह लोगों को होटल पाटलिपुत्र अशोक में क्वारेंटिन में रखा गया है.

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कोरोना पॉजिटिव शख्स सेक्स के दौरान अपने पार्टनर को भी कर सकता है संक्रमित

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दुनिया भर में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. कोरोना वायरस बड़ी आसानी से लोगों को अपना शिकार बना रहा है. कोरोना वायरस को लेकर कई तरह के बचाव करने की सलाह दी जा रही है. उनमें से एक है सोशल डिस्टेंसिंग. हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर भी लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. उनमें से एक सवाल भी है कि क्या कोरोना वायरस सेक्स से फैलता है?

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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का कहना है कि कोरोना वायरस सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिसीज नहीं है. लंदन के डॉक्टर एलेक्स जॉर्ज का कहना है, ‘अगर आप किसी के साथ पहले से ही रिलेशनशिप में हैं और शख्स के साथ एक तरह के ही माहौल में रह रहे हैं तो उस माहौल में किसी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए. हालांकि, अगर आप दोनों में से किसी को भी कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं तो आपको दूरी बना लेनी चाहिए और अपने ही घर में आइसोलेशन में चले जाना चाहिए.

आप भले ही एक साथ क्यों ना रहते हों, लक्षण दिखने पर आपस में कम से कम दो मीटर की दूरी बनाए रखें.’ अगर आपमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण भी हैं और अगर आप अपने पार्टनर से कोई दूरी नहीं रखते हैं तो निश्चित रूप से आपका पार्टनर भी कोरोना से संक्रमित हो जाएगा.

वहीं इस समय नए लोगों से शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे आपमें कोरोना खतरा बढ़ने की संभावना हो सकती है. कुछ लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण ऊपर से नहीं दिखाई देते हैं. हाल ही में चीन में ऐसे कई मामले देखे गए हैं जिनमें कोरोना वायरस के कोई लक्षण ना दिखने के बावजूद वो संक्रमित पाए गए थे. अगर आपको लगता है कि आप पूरी तरह से फिट हैं तब भी आप इस बीमारी को दूसरे तक पहुंचा सकते हैं. नजदीकी संपर्क और किस करने से यह और लोगों तक भी जा सकता है.

Sex and Coronavirus Disease 2019 (COVID-19)

https://www1.nyc.gov/assets/doh/downloads/pdf/imm/covid-sex-guidance.pdf

https://www.theguardian.com/us-news/2020/apr/05/can-i-have-sex-a-guide-to-intimacy-during-the-coronavirus-outbreak

पटना में मास्क नहीं पहनने पर देना पड़ सकता है जुर्माना

बिहार में कोरोना वायरस अपना पैर पसारता जा रहा है. बिहार में कोरोना से एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि 32 लोगों को कोरोना संक्रमित पाया गया है. कोरोना पर कंट्रोल करने के लिए पटना नगर निगम ने नया एक्सन प्लान तैयार किया है.

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लोग घरों में कैद हैं। सरकार पटनावासियों को हर तरह के एहतियात बरतने को कह रही है। अब हमें सुरक्षित करने के लिए प्रशासन की ओर से थोड़ी सख्ती भी की जा रही है।

डीडीसी रिची पांडेय ने कहा कि लोकल बॉडी को एडवाइजरी जारी किया है कि आवश्यकतानुसार शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं। इसमें मास्क पहनना शामिल हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन दुकानदार व ग्राहक को मास्क पहनने को लेकर एडवाइजरी जारी कर सकते हैं।

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लॉकडाउन को सख्ती से लागू किया जा रहा है. सरकार पटनावासियों को हर तरह के एहतियात बरतने को कह रही है. अब हमें सुरक्षित करने के लिए प्रशासन की ओर से थोड़ी सख्ती भी की जा रही है।.अगर आप सब्जी खरीदने के लिए मंडी जा रहे हैं तो मास्क पहन लें, अन्यथा नगर निगम जुर्माना लगा सकता है.

नगर निगम ने दुकानदारों से अपील की है कि बिना मास्क पहने सब्जी न बेचें तथा इसे पहनकर आने वालों को ही सब्जी दें।.कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए गाइडलाइन का सबको पालन करना होगा. मोकामा में तो मास्क नहीं लगाने पर जुर्माना भरने का आदेश भी जारी कर दिया गया है.

पटना नगर निगम के कंकड़बाग अंचल की तरफ से शनिवार को राजेंद्र नगर सब्जी मंडी में दुकानदारों के बीच मास्क बांटा गया। अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार मिश्र के नेतृत्व में मास्क वितरण सह जागरुकता अभियान चलाया गया। इस दौरान तीन-तीन मीटर की दूरी पर सब्जी की दुकान लगाने व ग्राहकों से एक-एक मीटर की दूरी पर रहकर सब्जी खरीदने की अपील की गई। इस समय निगम की टीम का ध्यान शहर के सभी सब्जी मार्केट पर केंद्रित है। लॉकडाउन में यहां आपस में दूरी बनाने की अपील की जा रही है।

दुनिया में पहली बार बाघिन में दिखे कोरोना वायरस के लक्षण

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अमेरिका से एक ऐसी खबर सामने आयी है जिसके बाद वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के कान खड़े हो गये हैं. दरअसल, अमेरिका का दावा है कि एक चिड़ियाघर में बंद बाघिन को कोरोनो वायरस से पॉजिटिव पाया गया है. ऐसा पहली बार देखने में आया है जब किसी जानवर को कोरोना हुआ है. अमेरिकी कृषि विभाग की राष्ट्रीय पशु चिकित्सा सेवा प्रयोगशालाओं के अनुसार, न्यूयॉर्क के ब्रोंक्स चिड़ियाघर में रखी गई एक बाघिन को कोरोनो पॉजिटिव पाया गया है. न्यूयॉर्क वो शहर है कोरोना के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं.

वन्यजीव संरक्षण सोसायटी की ओर से कहा गया है कि ब्रोंक्स चिड़ियाघर में बाघिन की देखभाल करने वाला कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित था, जिसकी वजह से बाघिन संक्रमित हुई है. उसकी उम्र चार साल है. सोसायटी ने बताया कि बाघिन नादिया और चिड़ियाघर में मौजूद अन्य पांच बाघों और शेरों में सांस की बीमारी के लक्षण दिखाई देने के बाद उनके नमूने लिए गए थे. बाघिन नादिया, उसकी बहन अजुल, दो अमूर बाघ और तीन अफ्रीकी शेरों में सूखी खांसी के लक्षण दिखाई दिए थे. हालांकि सभी के ठीक होने की उम्मीद जताई गई है.

पीएमसीएच की नर्स को मकान मालिक ने घर आने से किया मना

कोरोना से जंग में अग्रिम मोर्चे पर डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य कर्मी है. लेकिन समाज के कुछ लोगों के असंवेदनशील रवैये के कारण उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है. उन लोगों को मकान मालिकों द्वारा घर आने से मना किया जा रहा है. ताजा मामला पीएमसीएच की एक नर्स का है. लॉकडाउन के अगले ही दिन उनके मकान मालिक ने उन्हें घर आने से मना कर दिया है. पटना के खेमनीचक में यह नर्स किराये के मकान में रहती थीं. मकान मालिक का कहना है कि आप यो तो पीएमसीएच में ड्यूटी करो या फिर घर में रहो. ड्यूटी करोगी तो घर में घुसने नहीं देंगे. यह नर्स पीएमसीएच में ही कार्यरत अपनी सहेली और बिहार ए ग्रेड नर्सेज एसोसिएशन की महासचिव प्रमिला कुमारी के घर पर 12 दिनों से रहने को मजबूर है.

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नर्स ने बताया कि लॉकडाउन के अगले ही दिन मै जब पीएमसीएच में ड्यूटी कर रही थी, तब मकान मालिक का फोन आया कि आप आज से घर मत आइयेगा. अगर आयी तो ताला नहीं खोला जाएगा. मकान मालिक ने कहा कि आपका समान सुरक्षित है. और कोरोना खत्म होने के बाद आप आ सकती है. लेकिन, जब तक आप कोरोना संकट में पीएमसीएच में ड्यूटी कर रही है, तब तक यहा मत आइयेगा. वह बताती है कि यह सुनने के बाद अगले कई दिनों तक मै डिप्रेशन में चली गयी. इन दिनों अपनी सहेली के घर पर रह रही हूं. अच्छी बात मेरे साथ यही रही कि परिवार के सदस्य नालंदा स्थित गांव गये हुए है और अब भी सब गांव में है. वह कहती है कि मैने मकान मालिक को काफी समझाया भी कि मेरी ड्यूटी कोरोना आइशोलेशन वार्ड में नहीं है. पीएमसीएच में कोई भी कोरोना का मरीज इस समय नहीं है.

प्रशासन से शिकायत करने की भी बात कही, लेकिन मकान मालिक अपने फैसले पर अडिग है. फिर शिकायत इसलिये नहीं की कि कहीं इससे नाराज होकर वह घर से सामान भी निकालने को न बोल दें. ऐसा हुआ तो इस समय कोई घर भी नहीं देगा. यही सब सोच कर चुप हो गयी. परिवार और रिश्तेदार को भी नहीं बताया है. क्योकि वो परेशान हो जाएंगे. वहीं, इस घटना के बारे में बिहार ए ग्रेड नर्सेंज एसोसिएशन की महासचिव प्रमिला कुमारी कहती है कि वह नर्स अभी मेरे घर पर ही रह रही है. कोरोना के कारण ऐसी परेशानी इन दिनों कई और नर्सों के साथ भी हो रही है. दीघा से आने वाली पीएमसीएच की एक और नर्स को मकान मालिक परेशान कर रहा है. वे कहती है कि बेहतर होगा कि सरकार हम लोगों को फ्लैट मुहैया करवाये. जिससे बिना किसी परेशानी के हम मरीजों की सेवा कर सकें. वहीं इस बारे में पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ बीके कारक ने कहा कि मेरे पास ऐसा कोई मामला अभी नहीं आया है. अगर संबंधित नर्स हमें इस तरह की शिकायत करती है तो उनकी परेशानी दूर करने की कोशिश की जाएगी.

कोरोना से लड़ने में कितना कारगर है योग और आयुर्वेद , क्या कहते है योगगुरु बाबा रामदेव

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कोरोना वायरस और उससे होने वाली बीमारी कोविड-19 से पूरे देश-दुनिया में हाहाकार मचा है| पूरे विश्व में करीब पौने तीन लाख लोग इससे प्रभावित हो रहे है| हालाँकि भारत में इसके फैलने की दर काफी धीमी है लेकिन पिछले 24 घंटे में रिकॉर्ड 50 नए केस भारत में दर्ज किये गए है| जानकारों का मानना है कि अभी भारत में यह समस्या सामुदायिक स्तर पर नहीं फैला है लेकिन ऐसा हो गया तो इस बीमारी से निपटना काफी मुश्किल होगा| जैसा कि कोरोना वायरस का अभी तक कोई इलाज़ नहीं मिला है, इससे रोकथाम और जागरूकता सर्वाधिक महत्वपूर्ण है| इसी बीच योगगुरु बाबा रामदेव का दावा है कि आयुर्वेद और योग द्वारा कोरोना वायरस से संबंधित रोग को फैलने से रोका ही नहीं जा सकता बल्कि क्योर किया जा सकता है| आइये जानते है कि कोरोना के बारे में क्या कहते है योगगुरु बाबा रामदेव:

गिलोय, तुलसी, अदरक, हल्दी और काली मिर्च लड़ने में सक्षम है कोरोना से
योगगुरु का कहना है कि गिलोय, तुलसी, अदरक, हल्दी और काली मिर्च को पीस कर सुबह शाम पीने से कोरोना का रोकथाम किया जा सकता है| इन पदार्थो को कूटकर 400 ग्राम पानी मे लेकर पकाने और 100 ग्राम बच जाने पर उपयोग किया जा सकता है| इनका मानना है कि जिन व्यक्तियों को कोरोना है वह दिन में पांच-सात बार इसका उपयोग कर कोरोना को हरा सकते है| बाहर से लौटे व्यक्तियों के लिए भी इनका यही कहना है|

दरअसल गिलोय रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने में काफी करगर है और इसके साथ तुलसी, काली मिर्च, हल्दी और अदरक सर्दी, जुकाम समेत अनेक रोगों से लड़ने में कारगर है| यह कोरोना से उत्पन्न सभी लक्षण से लड़ने और कोरोना वायरस को नष्ट करने में सक्षम है|

कोरोना से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है जरुरी
योगगुरु के अनुसार कोरोना से होने वाले मौत से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना जरुरी है| कोरोना का सबसे अधिक घातक प्रभाव उन्हीं पर होता है जिनकी इम्यून सिस्टम कमजोर है| जहाँ इससे बहुत से मृत्यु हो चुकी है वहीँ काफी अधिक लोग संक्रमण के बाद भी पूरी तरह स्वस्थ्य हो चुके है| ऐसे में यदि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा लिया जाए तो कोरोना के प्रभाव से बचा जा सकता है| रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाने में गिलोय के साथ अश्वगंधा, शतावर, सफ़ेद मुसली, आंवला, शिलाजीत आदि लेना काफी कारगर है|

योगगुरु रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु योग एवं प्राणायाम को काफी अधिक महत्व देते है| उनका मानना है कि यदि नियमित तौर पर कपालभाती, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, उद्गीत और उज्जायी प्राणायाम किया जाए तो इम्यून सिस्टम पूरा मजबूत हो जाता है और इससे कोरोना समेत कई रोगों से बचा जा सकता है| कोरोना के रोकथाम हेतु अधिकतम समय प्राणयाम किया जाना चाहिए|

इस लेख में आपने कोरोना के रोकथाम और इलाज़ से संबंधित योगगुरु बाबा रामदेव के विचारों को पढ़ा| इससे संबंधित विचार आप कमेंट के माध्यम से साझा कर सकते है| यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे साझा करें|

बिहार में मिले 6 नये कोरोना पॉजिटिव, राज्य में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर कुल 30

बिहार में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है. गुरुवार को राज्य के विभिन्न जिलों से भेजे गये जांच सैंपल में छह नये लोगों में संक्रमण पॉजिटिव पाया गया. इस प्रकार राज्य में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर कुल 30 हो गयी है.

जांच में आरएमआरआइ में तीन और आइजीआइएमएस में तीन नये पॉजिटिव मरीजों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है. जिन छह नये मरीजों में कोरोना पॉजिटिव पाया गया है, उसमें गया के संक्रमित मरीज की 23 वर्षीया पत्नी और उसकी मां शामिल हैं. गया का वह युवक मुंगेर के नेशनल हॉस्पिटल में आइसीयू का इंचार्ज था. वहां पर मुंगेर के कोरोना पॉजिटिव मरीज का इलाज किया गया था. उसके कारण उसकी पत्नी संक्रमित हो गयी है. फिलहाल वह गर्भवती भी है.

इस इलाजरत युवक की मां भी गुरुवार को पाजिटिव पायी गयी. इसके अलावा आइजीएमएस में जिन तीन नये पोजिटिव मरीजों की जानारी सामने आयी है, उनमें दो गोपालगंज जिले के और नालंदा जिले का एक व्यक्ति शामिल है.

बिहार में कोरोना के 6 नये मरीज़, अब कुल संक्रमित 21 और 5387 लोग संदिग्ध

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बिहार राज्य में कोरोना वायरस पाॅजिटिव मरीजों की संख्या में मंगलवार को अचानक छह का इजाफा हो गया. पाॅजिटिव मरीजों में गोपालगंज के एक, गया के एक और चार सीवान जिले के पाये गये हैं. स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टि की है. इनमें राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीच्यूट आरएमआरआइ में दो और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान की जांच रिपोर्ट में चार पाजिटिव मरीज पाये गये हैं. इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना पाॅजिटिव की संख्या 16 से बढ़ कर 21 हो गयी है.

छह कोरोना पाॅजिटिव मरीजों में गोपालगंज और गया के एक-एक तथा सीवान जिले के चार पाये गये हैं. प्रदेश में कोरोना संक्रमण से पीड़ित जिलों में गया और गोपालगंज का भी नाम जुड़ गया है. पीड़ित जिलों की संख्या नौ पहुंच गयी है. खास यह कि गया जिले के मूल निवासी जिस युवक में कोरोना पाॅजिटिव पाया गया है, वह मुंगेर के नेशनल अस्पताल में आइसीयू का वरिष्ठ कर्मी है.

इसी अस्पताल में कोरोना से मृत युवक का प्रारंभिक इलाज किया गया था. इसके साथ मुंगेर जिले में पांच, पटना जिला में पांच, नालंदा जिला में एक, सीवान जिला में पांच, लखीसराय जिला में एक, बेगूसराय जिला में एक,सहरसा जिला में दो और गोपालगंज में एक नये मरीज की रिपोर्ट मिली है. जिनमें तीन मरीजों का इलाज के बाद जांच रिपोर्ट निगेटिव पाये जाने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया है.

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि मंगलवार को राज्य में कोरोना संक्रमण के कुल 208 संदिग्ध मरीजों की भर्ती करायी गयी है. अब तक राज्य में भर्ती संदिग्ध मरीजों की संख्या कुल 817 हो गयी है. इसमें से तीन को आइसीयू में भर्ती कराया गया है.

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने बताया कि राज्य में कुल 5387 लोगों को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. इसमें सारण क्षेत्र में सबसे अधिक लोग ऑब्जर्वेशन में रखे गये हैं जिसमें सीवान, सारण और गोपालगंज जिले शामिल हैं. उन्होंने बताया कि सर्वाधिक 3105 लोग सीवान जिले में ऑब्जर्वेशन में रखे गये हैं. ऑब्जर्वेशन में रखे गये लोगों की दूसरी बड़ी संख्या सारण जिले में है जहां पर अब तक 425 लोगों को निगरानी में रखा गया है.

गोपालगंज जिले में वर्तमान में 390 लोगों को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. इसके अलावा अररिया में (दो), औरंगाबाद में (55), सीतामढ़ी में (सात), सारण (425), भागलपुर (135), सुपौल (सात), मधुबनी (95), मधेपुरा (17), भोजपुर (81), गया (135), सीवान (3105), गोपालगंज (390), पटना (107), पूर्वी चंपारण (70), पश्चिम चंपारण (74), किशनगंज (25), मुजफ्फरपुर (173), रोहतास (13), समस्तीपुर (105), वैशाली (छह), दरभंगा (28), पूर्णिया (तीन), कटिहार (तीन), नवादा (43), बेगूसराय (सात) नालंदा (206), बक्सर (पांच), मुंगेर (18), अरवल (एक), जहानाबाद (20), कैमूर (12), बांका (चार), लखीसराय (एक), शिवहर (चार) और सहरसा (पांच) को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. इसमें से 327 लोगों ने अपना 14 दिनों का ऑब्जर्वेशन का समय पूरा कर लिया है.

CRPC की धारा 144 का उल्लंघन करने पर IPC की धारा 188 के तहत FIR क्यों होती है

हम देख रहे हैं कि केंद्र और तमाम राज्य सरकारें, किस प्रकार इस महामारी को लेकर गंभीर कदम उठाने पर मजबूर हो रही हैं। लॉकडाउन से लेकर दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CRPC) की धारा 144 लागू करने तक, सरकारों द्वारा इस वायरस के प्रकोप पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। इसी क्रम में हम ने देखा कि 23 मार्च से ही देश के तमाम जगहों पर CRPC धारा 144 को लागू कर दिया गया। मौजूदा लेख में हम यह जानेंगे कि आखिर क्यों, CRPC की धारा 144 का उल्लंघन करने पर स्वाभाविक परिणाम, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 धारा 188 के अंतर्गत मुक़दमे का चलना होता है। इसके अलावा, इनके मध्य क्या सम्बन्ध है, हम वह भी मौजूदा लेख में समझेंगे।

क्‍या है दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 144? 

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) की धारा 144 एक ‌‌डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सब-‌डी‌विजनल मजिस्ट्रेट या किसी अन्य कार्यकारी मजिस्ट्रेट को राज्य सरकार की ओर से किसी विशेष स्‍थान या क्षेत्र में एक व्यक्ति या आम जनता को “विशेष गतिविधि से दूर रहने” या “अपने कब्जे या प्रबंधन की किसी संपत्ति के संबंध में कोई आदेश लेने के लिए” आदेश जारी करने की शक्ति देती है। धारा 144 लगाने का आदेश “मजिस्ट्रेट” निम्न ‌स्थितियों पर रोक लगाने के लिए दे सकता है- 1-किसी भी व्यक्ति को कानूनी रूप से नियोजित करने में बाधा हो, परेशानी हो या चोट आने की आशंका हो। 2-मानव जीवन को, स्वास्‍थ्य और सुरक्षा पर संकट हो। 3- अशांति, दंगा या उत्पीड़न की आशंका हो। यह आदेश एक विशेष व्यक्ति, व्यक्ति के समूह या आम जनता के खिलाफ पारित किया जा सकता है। एक-पक्षीय (ex-parte) आदेश भी पारित किया जा सकता है। गौरतलब है कि *जगदीश्वरानन्द बनाम पुलिस कमिशनर* 1983 Cri.LJ 1872 , के मामले में यह कहा गया था कि धारा 144 का सार परिस्थिति की तात्कालिकता है एवं इसके प्रभाव को कुछ हानिकारक घटनाओं को रोकने में सक्षम होने की संभावना एवं सक्षमता से समझा जा सकता है। 

क्या CRPC की धारा 144 का दूसरा नाम कर्फ्यू है

हाल के कुछ मामले जैसा कि हम जानते ही हैं कि देश में कोरोना-वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते लॉकडाउन की घोषणा की है। वहीं कुछ ऐसे भी राज्य हैं जहाँ सरकार द्वारा सीआरपीसी की धारा 144 के तहत ‘कर्फ्यू’ (आम तौर पर धारा 144 को ‘कर्फ्यू’ के रूप में समझा जाता है, पर इस शब्द का इस धारा के सम्बन्ध में इस्तेमाल एकदम सटीक नहीं) लगाने के आदेश जारी किये गए हैं। 

CRPC की धारा 144 और IPC की धारा 188 के बीच क्या रिश्ता है

अब इस लेख में हम सीआरपीसी की धारा 144 और आईपीसी की धारा 188 के बीच के समबन्ध के बारे में बात करने से पहले यह जान लेते हैं कि इन राज्यों द्वारा, धारा 144 लगाते हुए आखिर क्या आदेश दिए गए हैं? अब चूँकि हर एक राज्य द्वारा धारा 144, सीआरपीसी के अंतर्गत जारी आदेश पर हम यहाँ चर्चा तो नहीं कर सकते, इसलिए हम केवल ‘दिल्ली पुलिस’ द्वारा धारा 144 के अंतर्गत जारी आदेश की बातों को पढेंगे। अमूमन यही आदेश (थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ), हर राज्य सरकार (दिल्ली में दिल्ली पुलिस) द्वारा जारी किये गए हैं। तो चलिए उदाहरण के लिए देखते हैं ‘दिल्ली पुलिस’ द्वारा धारा 144, सीआरपीसी के अंतर्गत जारी किया गया आदेश क्या कहता है:-  ”COVID-19 के प्रसार को कम करने के लिए, दिल्ली पुलिस धारा 144 दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 लागू करती है, और दिल्ली में सार्वजनिक स्वास्थ्य, सार्वजनिक सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए निम्न निषेधात्मक आदेश देती है  प्रदर्शनों, जुलूसों, विरोध प्रदर्शनों आदि के लिए किसी भी प्रकार की सभा निषिद्ध है।  
किसी भी सामाजिक/सांस्कृतिक/राजनीतिक/धार्मिक/शैक्षणिक/खेल/संगोष्ठी/सम्मेलनों का आयोजन निषिद्ध है। * साप्ताहिक बाजारों (सब्जियों, फलों और आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर), संगीत, प्रदर्शनियों आदि का संगठन निषिद्ध है। विभिन्न निजी टूर ऑपरेटरों द्वारा संचालित निर्देशित समूह पर्यटन निषिद्ध हैं।  COVID-19 के साथ ग्रसित/संदिग्ध हर एक व्यक्ति इसकी रोकथाम/उपचार के लिए उपाय करेगा अर्थात् घर करन्तीन/संस्था करन्तीन/अलगाव या ऐसा कोई व्यक्ति, निगरानी कर्मियों के निर्देशों का पालन करने के लिए सहयोग करेगा या सहायता प्रदान करेगा। यहाँ इस बात पर गौर किया जाना चाहिए कि इन आदेशों का पालन किया जाना अनिवार्य होता है। 
जैसा कि हमने ऊपर समझा, इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि कई बार इन आदेशों/आदेश को, लोगों को व्यक्तिगत रूप से निर्देशित कर पाना संभव नहीं होता है। ऐसे मामलों में इन्हें  एक पक्षीय आदेश के तौर पर निर्देशित कर दिया जाता है (अधिसूचना के रूप में या अन्यथा)। गौरतलब है कि ऐसा आदेश, किसी खास व्यक्ति, आम जनता या किसी खास व्यक्तियों के समूह को निर्देशित हो सकता है। ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे यह आदेश सभी के संज्ञान में आ जाये और इसका उल्लंघन न किया जाये। यदि ऐसा नहीं किया जायेगा तो उल्लंघन के मामले में किसी पर यह कहकर अभियोग नहीं चलाया जा सकेगा कि उसने लोक सेवक के आदेश का उल्लंघन किया, क्योंकि ऐसे आदेश को अधिसूचित ही नहीं किया गया था, अर्थात आम जनता, किसी खास व्यक्ति या समूह को निर्देशित ही नहीं किया गया था। 
इसके अलावा, जैसे कि हमने बात की, यह आदेश ‌‌डि‌स्टिक्ट मजिस्ट्रेट, सब-‌डी‌विजनल मजिस्ट्रेट या किसी अन्य कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किये जाते हैं (दिल्ली में यह आदेश कमिश्नर ऑफ़ पुलिस द्वारा जारी किया गया है), जोकि आईपीसी की धारा 188 के अंतर्गत भी, एक लोक-सेवक होते हैं और इसी के चलते, ऐसे आदेशों की अवज्ञा करने वाले व्यक्ति को इस धारा के अंतर्गत दंड भुगतना पड़ सकता है। 

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 188 संक्षेप में 

हालाँकि पिछले एक लेख मे हम यह समझ चुके हैं कि इस धारा के अंतर्गत लोक सेवक (Public Servant) द्वारा प्रख्यापित (Promulgated) किसी आदेश (Order) की अवज्ञा (Disobedience) करने वाले व्यक्ति को दण्डित करने का प्रावधान किया गया है। 
जानिए क्या कहती है आईपीसी की धारा 188 क्या हो सकते हैंं प्रशासन के आदेश की अवज्ञा के परिणामऐसे आदेश के लिए यह जरुरी है कि यह आदेश एक लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित होना चाहिए (जैसा कि धारा 144, सीआरपीसी के मामले में होता है)। ऐसा लोक सेवक, वह आदेश प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त होना चाहिए। धारा 188 के तहत जिसके खिलाफ मुकदमा चलना है, उस अभियुक्त को उस आदेश के बारे में जानकारी होनी चाहिए थी। और अभियुक्त द्वारा ऐसे आदेश की अवज्ञा होनी चाहिए। इसके अलावा, इस धारा के अंतर्गत यह भी बेहद जरुरी है कि ऐसी अवज्ञा के चलते या तो, (अ) विधिपूर्वक नियुक्त व्यक्तियों को बाधा (obstruction), क्षोभ (annoyance) या क्षति (injury), अथवा बाधा, क्षोभ या क्षति का जोखिम (risk) कारित की जाये, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखने वाला कोई कार्य किया जाये; या (ब) अगर ऐसी अवज्ञा, मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को संकट कारित करे, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखती हो, या उपद्रव या दंगा कारित करती हो, या कारित करने की प्रवॄत्ति रखती हो, केवल तब ही इस धारा के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान/यह प्रावधान हरकत में आएगा *(लक्ष्मी देवी बनाम एम्परर 1930 ILR 58 Cal। 971)*। 
यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि (अ) और (ब) दोनों ही मामलों के लिए, अलग-अलग सजाओं का प्रावधान है, जिसे आप विस्तार से समझने के लिए ऊपर लिंक से जुड़ा हुआ लेख पढ़ सकते हैं। धारा 188 आईपीसी एवं धारा 144 सीआरपीसी यह बहुत ही स्वाभाविक है कि यदि धारा 144, सीआरपीसी के तहत एक लोक-सेवक द्वारा एक आदेश जारी किया जाता है, तो ऐसे आदेश की अवज्ञा करने वाले व्यक्ति को धारा 188, आईपीसी के तहत दण्ड का सामना करना पड़ सकता है। कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि धारा 144, सीआरपीसी का आदेश जारी करते हुए ही इस बात का उल्लेख उस आदेश/अधिसूचना में मिल जाता है कि उन आदेशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को धारा 188, आईपीसी के तहत दण्ड का सामना करना पड़ेगा। हालाँकि, जिन मामलों में ऐसा नहीं लिखा होता है, वहां यह स्वाभाविक है कि चूँकि एक लोक-सेवक द्वारा ही धारा 144, सीआरपीसी के तहत आदेश जारी किये जाते हैं, इसलिए यदि उन आदेशो की अवज्ञा होगी तो धारा 188, आईपीसी के तहत मामला बनेगा, क्योंकि धारा 188, आईपीसी लोक सेवक के आदेशों की अवज्ञा से सम्बंधित है। 
इसके अलावा, जैसा कि *राम समुझ बनाम राज्य*।। AIR 1963 All. 579 के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा कहा गया था, धारा 188, आईपीसी के अंतर्गत धारा 144, सीआरपीसी के तहत पारित किये गए आदेश शामिल होंगे। हालाँकि, पटना उच्च न्यायालय द्वारा मुंद्रिका देवी एवं अन्य बनाम बिहार राज्य Criminal Miscellaneous No. 28008 of 2013 के मामले में यह साफ़ तौर पर कहा गया था कि जहाँ दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा, 144 के अंतर्गत कार्यवाही कानून के अंतर्गत उचित नहीं थी, वहां भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 188 के अंतर्गत अभियुक्तों के खिलाफ शुरू की गयी कार्यवाही भी बनाये रखने के योग्य नहीं होगी। अंत में, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि जैसा राज्य बनाम श्रीमती तुगला, AIR 1955 All. 423 के मामले में कहा गया है, धारा 188, आईपीसी के अंतर्गत किसी को दोषी तब तक नहीं करार दिया जा सकता है, जब तक कि लोकसेवक के आदेश की अवज्ञा के परिणाम, सकारात्मक रूप से साबित न कर दिए जाएँ।।

कोरोना से मृत मुंगेर के सैफ के संपर्क में आने वालों में अब कोरोना के लक्षण

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सैफ के संपर्क में आने वालों में अब कोरोना के लक्षण मिल रहे हैं। एम्बुलेंस चालक और पटना मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर से लेकर अब तक 70 लोगों को चिन्हित किया गया है। मुंगेर से लेकर पटना तक सैफ के संपर्क में आने वालों की पड़ताल की जा रही है। इसमें पटना के साथ मुंगेर के सिविल सर्जन कार्यालय से टीम गठित की गई है, जो  लगातार ऐसे लोगों को चिन्हित करने में जुटी है। 

दहशत में है एम्बुलेंस चालक
सैफ को एम्स से मुंगेर ले जाने वाला एम्बुलेंस चालक काफी दहशत में है। सैफ की मौत के बाद जब उसकी जांच रिपोर्ट कोरोना से संक्रमित आई तो स्वास्थ्य विभाग ने सबसे पहले एम्बुलेंस चालक को ही आइसोलेट किया था। हालांकि शुरुआती दौर में चालक में कोई संदिग्ध लक्षण नहीं मिला था। सिविल सर्जन के आदेश पर सावधानी को लेकर  उसे होम कोरेंटाइन में रखा गया था, लेकिन दो दिनों से उसे सर्दी व अन्य शिकायत मिलनी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि बुधवार को उसे तकलीफ कुछ बढ़ी, जिसके  बाद उसकी बेचैनी बढ़ गई। वह सैफ की मौत के बाद से ही डरा है और उसे लगता है कि वह भी नहीं बचेगा। गुरुवार को सिविल सर्जन ने एम्बुलेंस चालक की जांच के लिए  डॉक्टरों को निर्देश दिया है। आरएमआरआई में उसका नमूना लेकर जांच के लिए भेजने को कहा गया है। 

डॉक्टर को कर दिया गया है अलग 
कोरोना संक्रमित सैफ की डायलिसिस मुंगेर में हुई थी। इसके बाद परिजन उसे लेकर पटना मेडिकल कॉलेज आए थे। पटना मेडिकल कॉलेज में उसका पर्चा कटाया गया था और फिर सैफ ने ही एक डॉक्टर को अपने हाथ से पर्चा थमाया था। पीएमसीएच में भीड़ के कारण सैफ को अस्पताल से वापस कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि पटना मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ के कारण सैफ को भर्ती करने से इनकार कर दिया गया था। पर्चा लेकर डॉक्टर ने सैफ से उसकी समस्या को लेकर बात करने के साथ जांच पड़ताल भी की थी। ऐसे में आशंका डॉक्टर के भी संक्रमित होने को लेकर है। 

डॉक्टर में हुआ संक्रमण तो संकट में होगी मरीजों की जान 
पटना मेडिकल कॉलेज के जिस डॉक्टर के बारे में संक्रमण की आशंका जताई जा रही है, वह यूरोलॉजी विभाग के बताए जा रहे हैं। अगर उनके अंदर संक्रमण की पुष्टि हुई तो कई मरीजों की जान सांसत में होगी, क्योंकि संबंधित डॉक्टर ने सैफ की रिपोर्ट आने के बाद तक मरीजों का इलाज किया है। दर्जनों मरीजों का परीक्षण करने के साथ उन्हें दवा दी गई। हालांकि जब तक डॉक्टर की जांच नहीं हो जाती है, इस मामले में कोई बड़ा निणर्य नहीं लिया जा रहा है। डॉक्टर को मेडिकल कॉलेज से अलग रहने को कहा गया है। 

संदिग्ध की 70 से बढ़ सकती है संख्या 
सिविल सर्जन कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक सैफ के संपर्क में आने वालों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। अब तक 70 लोगों को चिन्हित किया गया है, जो सैफ के सीधे संपर्क में आए हैं। अब इन 70 लोगों की जांच के बाद इसमें पॉजिटिव आए लोगों के संपर्क में आने वालों की हिस्ट्री खंगाली जाएगी। बताया जा रहा है ये संख्या हजारों में पहुंच सकती है। हालांकि परिवार के सदस्यों के साथ अन्य करीबी लोगों की जांच कराई गई थी, जिसमें दो में सक्रमण होना पाया गया था। इस मामले में पूरा स्वास्थ्य महकमा जांच में जुटा हुआ है और इस चेन को तोड़ने में लगा है, जो सैफ के कारण बनी हुई है। सैफ 13 मार्च को कतर से लौटा था। वह किडनी का मरीज था और इसपर उसे कोरोना का संक्रमण भी हो गया। मुंगेर में इलाज कराने के साथ वह पटना के कई बड़े अस्पतालों में भटका, फिर एम्स में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार को उसकी मौत हो गई।

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