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पाकिस्तान: अदालत में ईशनिंदा के आरोपी की गोली मारकर हत्या, हमलावर के समर्थन में निकली रैली

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बीते बुधवार को पेशावर में ईश निंदा के आरोपी एक अमेरिकी नागरिक की अदालत में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. अमेरिका ने इस पर कार्रवाई की मांग की है. शुक्रवार को पेशावर में हत्या के आरोपी के समर्थन में हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन कर उसकी रिहाई की मांग की है.

पेशावर में नसीम की हत्या के आरोपी के समर्थन में निकली रैली. (फोटो: रॉयटर्स)

पेशावर/ वाशिंगटन: बीते बुधवार को पेशावर की एक अदालत में ईशनिंदा को लेकर मुकदमे का सामना कर रहे अहमदी समुदाय के एक व्यक्ति की जज के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

व्यक्ति का नाम ताहिर नसीम था और वे अमेरिकी नागरिक थे. 57 वर्षीय नसीम की मौके पर ही मौत हो गई. हमलावर फैसल को घटनास्थल से गिरफ्तार कर लिया गया और हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्तौल भी जब्त कर ली गई.

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को पेशावर में कट्टरपंथियों ने इस हमलावर के समर्थन में हजारों की संख्या में रैली निकाली.

नसीम को दो साल पहले ईश निंदा के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने बताया कि बुधवार को सुनवाई से पहले अदालत कक्ष में अतिरिक्त सत्र न्यााधीश शौकतुल्ला खान के सामने उन्हें गोली मार दी गई. उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

घटना के दौरान मौके पर मौजूद रहे एक वकील ने बताया कि मृतक के खिलाफ ईश निंदा कानून के तहत एक मामला दर्ज था.

वहीं नसीम की हत्या पर अमेरिका ने हैरानी और नाराजगी जाहिर की है और इस्लामाबाद से कहा है कि वह अक्सर गलत तरीके से इस्तेमाल होने वाले ‘ईशनिंदा कानून’ में तुरंत सुधार करे और दोषी को सजा दे.

अमेरिका के विदेश मंत्रालय के मुख्य उप प्रवक्ता केल ब्राउन ने कहा कि वे पाकिस्तान में अदालत कक्ष के भीतर अमेरिकी नागरिक ताहिर नसीम की हत्या से स्तब्ध हैं और गुस्से में है.

उन्होंने आगे कहा कि नसीम को कुछ लोग बहलाकर इलियोनिस से पाकिस्तान ले गए और वहां ईशनिंदा कानून के तहत उन्हें फंसा दिया गया.

नसीम को 2018 में हिरासत में लिया गया था, अमेरिकी सरकार तब से ही उन्हें और उनके परिवार को राजनयिक सहायता मुहैया करा रही थी. हालांकि अमेरिका ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह पाकिस्तान पहुंचे कैसे थे.

वहीं पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि नसीम को तब गिरफ्तार किया गया था जब उन्होंने खुद को इस्लाम का पैगंबर घोषित किया था.

नसीम पर हमला करने वाले पहचान शुरुआत में खालिद खान के रूप में हुई थी, लेकिन बाद में बताया गया कि उसका नाम फैसल खान है.

हालांकि इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वह बुधवार को अदालत कक्ष के अंदर कैसे पहुंचा और उसे हथियार कहां से मिला.

बताया गया है कि यह अदालत छावनी इलाके में अत्यधिक सुरक्षा वाले क्षेत्र में है. न्यायिक परिसर के मुख्य द्वारा और इसके अंदर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है.

इस घटना के बाद अमेरिका द्वारा पाकिस्तान से ईश निंदा कानून  बदलाव करने को कहा गया है लेकिन देश के माहौल में इसमें किसी भी तरह का परिवर्तन की संभावना से विरोध-प्रदर्शन शुरू हो जाते हैं.

शुक्रवार को पेशावर में हुई रैली में आये प्रदर्शनकारियों ने नसीम की हत्या के आरोपी फैसल का समर्थन किया और उनकी तारीफ की.

उन्होंने यह मांग भी उठाई कि फैसल को फौरन जेल से रिहा किया जाए. उनका कहना था कि फैसल ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि सरकार ईश निंदा के मामलों में सजा देने में बेहद सुस्त है.

रैली की अगुवाई करने वाले मुफ्ती शहाबुद्दीन पोपलजई ने कहा, ‘हम कानून अपने हाथ में लेने की तरफदारी नहीं करते हैं, लेकिन फैसल ने वो किया जो सरकार को दो साल पहले कर देना चाहिए था.’

ज्ञात हो कि पाकिस्तान में ईशनिंदा अत्यधिक संवेदनशील मुद्दा है, जहां महज आरोप लग जाने पर ही आरोपी अक्सर भीड़ की हिंसा का शिकार बन जाता है.

अहमदी, पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक हैं. पाक संसद ने 1974 में इसे गैर मुस्लिम समुदाय घोषित किया था. एक दशक बाद इस वर्ग के लोगों को मुस्लिम कहे जाने से प्रतिबंधित कर दिया गया.

हालांकि पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा अब तक ईश निंदा के लिए मौत की सजा नहीं दी गई है, लेकिन ढेरों आरोपी इसकी कतार में हैं. इनमें से अधिकतर अहमदी समुदाय से हैं.

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के अलावा यूएस कमीशन ऑफ इंटरनेशनल फ्रीडम ने भी नसीम की हत्या की निंदा की है. कमिश्नर जॉनी मूर ने एक बयान में कहा, ‘पाकिस्तान का ईश निंदा कानून समर्थन के योग्य तो है ही नहीं, लेकिन यह विश्वास करना मुश्किल है कि वे एक व्यक्ति, वो भी अमेरिकी, की उनकी अदालत के अंदर हत्या होने से बचा पाने में असमर्थ हैं.’

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी त्रासद घटनाओं से बचने के लिए पाकिस्तान को ईश निंदा के आरोपियों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करनी चाहिए.

बीते महीने कमीशन ने अपनी 2020 की रिपोर्ट में पाकिस्तान को यहां अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार के चलते ‘कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न’ घोषित किया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)



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