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NASA का Perseverance rover प्रक्षेपण के ठीक बाद क्यों चला गया था सेफ मोड में

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नासा के मंगल रोवर के प्रक्षेपण के कुछ मिनट में ही गड़बड़ी हुई और ठीक भी हो गई. (फोटो: NASA/ twitter)

नासा (NASA) के पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance rover) के प्रक्षेपण के कुछ ही मिनटों बाद उसमें तकनीकी गड़बड़ी( Technical Glitch) आ गई थी.

दो दिन पहले नासा (NASA) का पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) मंगल ग्रह (Mars Gorup) के लिए प्रक्षेपित किया गया. प्रक्षेपण के कुछ ही मिनटों बाद पर्सिवियरेंस रोवर में कुछ गड़बड़ी की खबर आई लेकिन बाद में सब सामान्य हो गया. बाद में बताया गया कि प्रक्षेपण के बाद ही यह रोवर एक इंजिनियरिंग गड़बड़ी के चलते सेफ मोड (Safe Mode) में चला गया.

क्या कहा नासा ने गड़बड़ी के बारे में
इस रोवर को फ्लोरिडा के केप कैनावरल एयर फोर्स स्टेशन से एटल 5 रॉकेट के साथ प्रक्षेपित किया गया. यह प्रक्षेपण 30 जुलाई 2020 को स्थानीय समयानुसार सुबह 7.50 बजे हुआ. नासा के स्पेस पोर्टल में यह कहा गया कि इस तरह की छोटी-मोटी गड़बडियां पहले भी होती रही हैं. और इनके पर्सिवियरेंस रोवर के साथ होने की भी गुंजाइश थी.

क्यों हुई थी ये गड़बड़ीनासा की पर्सिवियरेंस टीम ने खुलासा किया कि मार्स रोवर प्रक्षेपण के कुछ ही मिनटों में सेफ मोड में चला गया था. इसकी वजह यह रही कि अंतरिक्ष यान का तापमान उम्मीद से ज्यादा ठंडा हो गया था. इस बात का अंदाजा पर्सिवियरेंस के इंजीनियरों तक को नहीं था. जब रॉकेट पृथ्वी पर्याप्त ऊंचाई पर गया तब तापमान वापस बढ़ा और सब कुछ सामान्य हो गया. इसमें चिंता करने वाली कोई बात नहीं थी. नासा ने इस बात की भी पुष्टि की कि इस तकनीकी गड़बड़ी से मिशन को कोई खतरा नहीं है.  नासा के मीडिया बयान में अधिकारी ने जोर दिया कि जैसा का नाम से जाहिर है यह सेफ मोड सुरक्षित है. इसे अंतरिक्ष यान और उसकी चीजों की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है.

मंगल-पृथ्वी के बीच की दूरीनासा का यह उन्नत रोवर अगले साल 18 फरवरी 2021 को मंगल की सतह पर जेजीरो क्रेटर पर लैंड करेगा. मंगल और पृथ्वी के बीच की दूरी लगातार बदलती रहती है क्योंकि दोनों ही सूर्य का चक्कर लगाते हैं, लेकिन पृथ्वी की कक्षा मंगल की कक्षा के मुकाबले छोटी है क्योंकि पृथ्वी जहां सूर्य से तीसरा ग्रह है वहीं मंगल सूर्य से चौथा ग्रह है. इसी वजह से दोनों कई बार एक दूसरे से पास होते हैं तो कई बार एक दूसरे से दूर मंगल और पृथ्वी के बीच की न्यूनतम दूरी 5.46 करोड़ किलोमीटर है. जबकि इन दोनों की अधिकतम दूसरी 40.1 करोड़ किलोमीटर होती है. दोनों के बीच औसत दूरी 22.5 करोड़ किमी है.मंगल ग्रह पर दिखाई दिए खिसकते हुए रेत के टीले, बदली वैज्ञानिकों की ये धारणा दो बार टल चुका था रोवर का प्रक्षेपणनासा ने अपने इस रोवर का प्रक्षेपण पहले इसी महीने दो बार टल चुका है. लेकिन उसने समय सीमा 15 अगस्त तक की रखी थी जिसकी वजह से उसे अपने इस पूरे मिशन में आमूल चूल बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ी. दो बार प्रक्षेपण की तारीख बदलने के बाद भी पर्सिवियरेंस के मंगल पर उतरने की तारीख 18 फरवरी 2021 ही है.

केवल नासा की ही नहीं है मंगल में दिलचस्पी

गौरतलब है कि नासा के अलावा चीन और यूएई की अंतरिक्ष एजेंसियों ने भी इसी महीने मंगल के लिए अपने अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित किए हैं. यूएई का अंतरिक्ष यान मंगल की कक्षा का रह कर ही मंगल ग्रह का अध्ययन करेगा तो वहीं चीन का अंतरिक्ष यान मंगल की कक्षा में चक्कर लगाने के बाद  उसकी सतह पर अपने रोवर भी उतारेगा. ऐसा करने वाला चीन पहला देश होगा.

क्यों मंगल की सतह के नीचे जीवन की तलाश कर रहे हैं वैज्ञानिक

मंगल पर अभियानों की दिलचस्पी विभिन्न देशों में अचानक ही नहीं बढ़ी है. बेशक मंगल के अभियानों में फिलहाल नासा ही सबसे आगे रहा है, लेकिन लेकिन पिछले कुछ सालों में दूसरे देशों की अंतरिक्ष में तेजी से दिलचस्पी बढ़ी है. इसमें भारत और चीन के नाम उल्लेखनीय है. इसके अलावा यूरोपीय संघ और रूस भी अंतरिक्षीय गतिविधियों में सक्रिय हैं.



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