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Yoga During Monsoon: मानसून के दौरान फिट रहने के लिए करें ये 4 योग आसन

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नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Yoga During Monsoon: बारिश के मौसम में चाय या कॉफी का कप लेकर घर की खिड़की पर घंटों बैठे रहने से बेहतर और क्या हो सकता है। मानसून एक ऐसा मौसम होता है, जिसका आप कई तरीकों से मज़ा ले सकते हैं। हालांकि, इस सुहाने मौसम के साथ पानी से जन्म वाली, सांस से जुड़ी और यहां तक कि पेट से जुड़ी कई तरह की बीमारियां भी साथ आती हैं।   

इसलिए हम सभी को वर्कआउट के ज़रिए अपने इम्यून सिस्टम को मज़बूत रखने की ज़रूरत होती है। बारिश के मौसम में बाहर जाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, खासकर एक्सरसाइज़ के लिए। ऐसे में आप घर पर रहकर कुछ योगा आसन, प्रणायाम और ध्यान ज़रूर कर सकते हैं। वहीं, मानसून के लिए योग में खास आसन और टेकनीक्स हैं, जिनके कई फायदे हैं।

जल नमस्कार

इस योग की खास बात ये है कि कुछ विशिष्ट आसन और योगिक तकनीके हैं जो मानसून के लिए बनाई गई हैं, जो आपको मज़बूत प्रतिरक्षा देने में मदद करते हैं। ऐसा ही हिमालयी प्रवाह का जल नमस्कार है। यह एक शक्तिशाली तकनीक है जिसमें आसन होते हैं जो पानी के तत्व के अनुरूप होते हैं। जल नमस्कार 28 काउंट के साथ बनाया गया विन्यास है जो आपके शरीर के अंदर जल तत्व को पहचानने और अनुभव करने में आपकी मदद करेगा।इस आसन विनयसा को ‘फ्लो’ भी कहा जाता है, जिनकी गुणवत्ता पानी से संबंधित है, पद्मासन, अर्ध मत्स्येन्द्र आसन, हलासना, सुपता वज्रासन और मत्स्य आसन।

मत्स्य आसन

– योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं, आपकी टांगें जुड़ी रहें, जबकि आपके साथ आराम से शरीर से जुड़े रहें। 

– अपनी हथेलियों को हिप्स के नीचे लगाएं, हथेलियां जमीन की तरफ रहेंगी। अब कोहनियों को एक-दूसरे के करीब लाने की कोशिश करें।  

– अपने पैरों की पालथी मार लें। जांघें और घुटने फर्श पर सपाट रहेंगे।

– सांस खींचते हुए सीने को ऊपर की तरफ उठाएं। सिर भी ऊपर की तरफ उठाएं, और सिर का ऊपरी हिस्सा जमीन को छूता रहेगा। 

– शरीर का पूरा वजन कोहनियों पर रहेगा न कि सिर पर। 

– जैसे-जैसे सीना उठेगा वैसे ही कंधों की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ेगा। 

– इस स्थिति में तभी तक रहें जब तक आप सहज अनुभव करते रहे। सांसों की गति सामान्य बनाए रहें। 

– सांस बाहर निकालें और पुरानी स्थिति में वापस लौटें। 

– सबसे पहले सिर को उठाएं और उसके बाद सीने को जमीन पर वापस लाएं। टांगों को सीधा करें और विश्राम करें। 

हलासना

– योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। 

– अपने हाथों को शरीर से सटा लें। हथेलियां जमीन की तरफ रहेंगी। 

– सांस भीतर की ओर खींचते हुए पैरों को ऊपर की तरफ उठाएं।

– टांगे कमर से 90 डिग्री का कोण बनाएंगी। दबाव पेट की मांसपेशियों पर रहेगा। 

– टांगों को ऊपर उठाते हुए अपने हाथों से कमर को सहारा दें।

– सीधी टांगों को सिर की तरफ झुकाएं और पैरों को सिर के पीछे ले जाएं। 

– पैरों के अंगूठे से जमीन को छुएंगे। 

– हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर सीधा रख लें। हथेली नीचे की तरफ रहेगी। 

– कमर जमीन के समानांतर रहेगी।

– इसी स्थिति में एक मिनट तक बने रहें सांसों पर ध्यान केंद्रित करें सांस छोड़ते हुए, टांगों को वापस जमीन पर ले आएं।

– आसन को छोड़ते हुए जल्दबाजी न करें। टांगों को एक समान गति से ही सामान्य स्थिति में वापस लेकर आएं। 

पश्चिमोत्नासन 

– योगा मैट पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों पैरों को फैलाकर आपस में परस्पर रखें और पूरे शरीर को पूरा सीधा तना हुआ रखें।

– अपने दोनों होथों को धीरे-धीरे उठाते हुए सिर की ओर ऊपर ज़मीन पर टिकाएं।

– उसके बाद दोनों हाथों को ऊपर की ओर तेज़ी से उठाते हुए एक झटके में कमर के ऊपर के भाग को उठाकर बैठने की स्थिति में आते हुए धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों से अपने पैरों के अंगूठों को पकड़ने की कोशिश करें।

– इस क्रिया को करते समय पैरों और हाथों को बिल्कुल सीधा रखें और अपनी नाक को पैर के घुटने से छूने की कोशिश करें।

– अब आप पश्चिमोत्नासन की स्थति में हैं।

– यह क्रिया को 10-10 सेकेंड का आराम लेते हुए 3 से 5 बार करें। इस आसन को करते समय सांसों की गति सामान्य रखें।

Posted By: Ruhee Parvez

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