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वो नेता और अधिकारी जिन पर रही गोपालगंज पुल निर्माण की जिम्मेदारी, पढ़ें- इनसाइड स्टोरी

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  • अक्टूबर 2012 में हुआ था पुल का टेंडर
  • हैदराबाद की कंपनी ने बनाया है पुल
  • कंपनी के पास बिहार में कई प्रोजेक्ट

बिहार में गोपालगंज के सत्तरघाट ब्रिज का अप्रोज रोड गिरने से सियासी बवाल मच गया है. चौतरफा घिरी नीतीश कुमार सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. जांच के लिए 5 सदस्यों की टीम गठित की गई है

ये टीम रविवार को गोपालगंज जाएगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. सरकारी सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के हिसाब से ठेकेदार और इंजीनियरों पर एक्शन लिया जाएगा. हालांकि, अभी तक बिहार सरकार की तरफ से कंस्ट्रक्शन कंपनी को लेकर कुछ नहीं कहा गया है. पुल निर्माण के इस काम में कंपनी के साथ-साथ पुल निर्माण निगम और संबंधित विभाग के तमाम मंत्री भी जिम्मेदारी संभाल रहे थे.

गोपालगंज का सत्तरघाट पुल 2012-2020 के बीच बनकर तैयार हुआ है. इस पुल का निर्माण हैदराबाद की वशिष्टा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया है. कंस्ट्रक्शन कंपनी की तरफ से लापरवाही की बात सामने आई है. जानकारी सामने आई है कि पुल के अप्रोच रोड के दोनों किनारों को पिचिंग कर मजबूत नहीं किया गया था. यही वजह रही कि जब गंडक नदी में 3 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया तो यह अप्रोच रोड पानी का प्रेशर नहीं झेल पाई.

बता दें कि हर साल गंडक नदी में करीब 8 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है, लेकिन इस बार 3 लाख क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया. इसके बावजूद गोपालगंज के पुल का अप्रोच रोड पानी की टक्कर नहीं झेल सका और जमीन में समा गया.

सबसे हैरानी की बात ये है कि बिहार सरकार की तरफ से कोई भी कंस्ट्रक्शन कंपनी पर सवाल नहीं उठा रहा है. इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार पुल बनाने वाली कंपनी पर कितनी मेहरबान है. यहां तक कि सड़क निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने तो यहां तक कह दिया कि आपदा में ऐसा हो जाता है.

किसकी सत्ता में बना यह पुल?

गोपालगंज का यह पुल 2012 से लेकर 2020 तक तैयार होने में आठ साल लगे हैं. इस दौरान बिहार में लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं. जबकि सड़क निर्माण विभाग की जिम्मेदारी अलग-अलग मंत्रियों के पास रही. 2012-2013 तक बीजेपी के खाते से बिहार सरकार में मंत्री नंद किशोर यादव विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इसके बाद 2013 से 2015 तक जेडीयू के राजीव रंजन सिंह ने यह विभाग संभाला.

2015 में जब जेडीयू ने आरजेडी के साथ मिलकर बीजेपी को हराया और सरकार बनाई तो उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को निर्माण कार्यों का विभाग सौंपा गया. तेजस्वी के पास 2017 तक यह जिम्मेदारी रही. इसी बीच आरजेडी और जेडीयू फिर अलग हो गए और नीतीश कुमार ने फिर से बीजेपी का समर्थन लेकर सरकार बना ली.

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2017 से ही बीजेपी के नंद किशोर यादव इस विभाग के मंत्री हैं. यानी जब पुल का निर्माण शुरू हुआ था, तब भी संबंधित मंत्रालय बीजेपी के नंद किशोर यादव के पास था और अब जबकि पुल तैयार होने के तुरंत बाद उसका अप्रोच रोड गंडक नदी के बहाव में धराशाई हुआ है तब भी ये विभाग नंद किशोर यादव ही संभाल रहे हैं.

वहीं, इस पूरे अरसे में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के MD की जिम्मेदारी पांच अलग-अलग लोगों पर रही. 2011-14 तक देव नारायण प्रसाद, 2014-16 तक रविशंकर प्रसाद सिंह, 2016-17 तक रंजन कुमार, 201-2020 तक उमेश कुमार एमडी रहे. फिलहाल सुरेंद्र यादव निगम के एमडी पद पर हैं.

मुख्य तौर पर गोपालगंज के इस पुल निर्माण की पूरी जिम्मेदारी बीजेपी नेता और मंत्री नंद किशोर यादव और सुरेंद्र यादव के पास थी.

कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास बिहार में कई प्रोजेक्ट

हैदराबाद की कंपनी वशिष्टा कंस्ट्रक्शन का बिहार में कितना दखल है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि मौजूदा वक्त में भी कंपनी के 6 बड़े प्रोजेक्ट राज्य में चल रहे हैं. कंपनी के पास गंडक नदी पर हाई लेवल ब्रिज, बागमती नदी पर हाई लेवल ब्रिज, ईस्टर्न कोसी प्रोजेक्ट, ईस्ट सेंट्रल रेलवे ब्रिज के अलावा एक प्रोजेक्ट कोसी और एक कंदधाट में बांध का है. यानी नदी और पुल के प्रोजेक्ट पर ही ये कंपनी बिहार में लगातार काम कर रही है.

क्या है कंपनी का बिहार कनेक्शन?

वशिष्टा कंस्ट्रक्शन कंपनी की शुरुआत 1991 में हुई थी. कंपनी की शुरुआत नागाराजू मंथेना ने थी, जो इसके एमडी भी हैं. बिहार में कंपनी को पहला प्रोजेक्ट 2006 में सिंचाई विभाग और पुल निर्माण का मिला था. इस वक्त भी बिहार में नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री थे. 2008 में बाढ़ के बाद कोसी नदी का प्रोजेक्ट रिकॉर्ड टाइम में पूरा करने पर कंपनी को पहचान मिली थी. इसके बाद बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने कंपनी को ‘स्टार कॉन्ट्रैक्टर’ के अवॉर्ड से नवाजा था. इसके अलावा बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग की तरफ से कंपनी को एक्सीलेंस का सर्टिफिकेट भी दिया गया.

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बिहार में कंपनी के कई रीजनल ऑफिस भी हैं. बेतिया, सीतामढ़ी, सुपौल और पटना में कंपनी के ऑफिस हैं. ये कंपनी बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, जल संसाधन विभाग और ईस्ट सेंट्रल रेलवे के साथ मिलकर विकास कार्य करती है.

16 जून को हुआ था सत्तरघाट पुल का उद्घाटन

गोपालगंज के जिस सत्तरघाट पुल पर रोड टूटी है उसका उद्घाटन लॉकडाउन के दौरान बीते 16 जून को ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था. लेकिन ठीक एक महीने बाद ही 15 जुलाई को पुल का अप्रोच रोड गिर गया. इस प्रोजेक्ट में पुल की लंबाई 1.44 किलोमीटर थी. इसके साथ ही ब्रिज के दोनों तरफ 10.15 किलोमीटर की अप्रोच रोड भी प्रोजेक्ट में शामिल थी.

शुरुआत में इस प्रोजेक्ट का पूरा बजट 209.39 करोड़ रुपये थे. बाद में इसका बजट 264 करोड़ हो गया. बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड ने इस पुल का टेंडर किया था. 20 अक्टूबर 2012 को यह प्रोजेक्ट वशिष्टा कंस्ट्रक्शन को मिला था और प्रोजेक्ट के पूरा होने की मियाद 19 अक्टूबर 2015 रखी गई थी. हालांकि, इसका उद्घाटन इस साल 16 जून को हुआ है. फिलहाल, कंपनी की तरफ से बताया गया है कि निर्माण के दौरान निगम के तमाम इंजीनियर और अधिकारी मौके पर जाकर जायजा लेते थे. हालांकि, कंपनी ने किसी अधिकारी या इंजीनियर का नाम नहीं बताया है.

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