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India vs China: भारतीय राफेल के मुकाबले चीन का J-20, कौन है ज्‍यादा ताकतवर?

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नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

India Rafale vs Chengdu J-20 : भारत को इसी हफ्ते फ्रांस से छह राफेल लड़ाकू विमान मिल रहे हैं। एशिया में भारतीय एयरफोर्स की धाक पहले से है, राफेल जुड़ने के बाद उसकी ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। यह एयरक्राफ्ट भारत को जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाकों तक ऑल-वेदर एक्‍सेस देगा। चीन और पाकिस्‍तान के साथ लगी सीमा पर इसकी तैनाती से भारत का एयर डिफेंस पहले से कहीं ज्‍यादा मजबूत हो जाएगा। भारतीय राफेल के मुकाबले में चीन का Chengdu J-20 और पाकिस्‍तान का JF-17 लड़ाकू विमान हैं। मगर ये दोनों ही राफेल के मुकाबले थोड़ा कमतर मालूम होते हैं।

एक साथ कई रोल अदा करता है राफेल

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राफेल और J-20, दोनों ही सिंगल सीटर, ट्विन इंजन एयरक्राफ्ट्स हैं। जहां चीनी J-20 का मेन रोल स्‍टील्‍थ फाइटर का है, वहीं राफेल को कई कामों में लगाया जा सकता है। चीन J-20 का यूज दुश्‍मन पर नजर रखने के लिए करता है। राफेल को निगरानी के अलावा सोर्टीज और अटैक में भी आसानी से यूज किया जा सकता है। राफेल को भारत की जरूरतों के हिसाब से मॉडिफाई किया गया है जो इसे चीनी J-20 पर थोड़ी बढ़त देता है।

पाकिस्‍तानी JF-17 को चीन ने किया मजबूत

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पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर यह लड़ाकू विमान डेवलप किया है। यह मल्‍टी रोल एयरक्राफ्ट है जो हवा से हवा और हवा से जमीन में मार कर सकता है। चीन ने इसमें कुछ नई चीजें जोड़ी हैं जिसके बाद इसकी क्षमता बढ़ गई है। इसमें PF-15 मिसाइलें यूज होने लगी हैं जिसमें इन्‍फ्रारेड सिस्‍टम भी लगा है। इस मिसाइल की रेंज 300 किलोमीटर है और यह सबसे ऐडवांस्‍ड मिसाइल्‍स में से एक है। जब PF-15 मिसाइलें इसमें जोड़ी गई थीं तो अमेरिका ने भी विरोध किया था। राफेल में यूज होने वाली मिसाइल्‍स की रेंज इससे कम है।

J-20 से कहीं ज्‍यादा दूरी तक जा सकता है राफेल

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चीन का J-20 विमान राफेल के मुकाबले भारी है। राफेल जहां अधिकतर 24,500 किलो वजन (विमान समेत) कैरी कर सकता है। वहीं, J-20 34 हजार किलो से लेकर 37 हजार किलो वजन ले जा सकता है। राफेल की रेंज 3,700 किलोमीटर है जो J-20 से कहीं ज्‍यादा है। J-20 की बेसिक रेंज 1,200 किलोमीटर है जिसे 2,700 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। दोनो ही लड़ाकू विमान अपने साथ चार-चार मिसाइल ले जा सकते हैं। दोनों की टॉप स्‍पीड भी लगभग एक जैसी (2100-2130 किलोमीटर प्रतिघंटा) है।

पहाड़ी इलाकों में J-20 पर भारी साबित होगा राफेल

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J-20 की लंबाई 20.3 मीटर से 20.5 मीटर के बीच होती है। इसकी ऊंचाई 4.45 मीटर और विंगस्‍पैन 12.88-13.50 मीटर के बीच है। जबकि राफेल की लंबाई 15.30 मीटर और ऊंचाई 5.30 मीटर है। राफेल का विंगस्‍पैन सिर्फ 10.90 मीटर है जो इसे पहाड़ी इलाकों में उड़ने के लिए आदर्श एयरक्राफ्ट बनाता है। विमान छोटा होने से उसकी मैनुवरिंग में आसानी होती है।

दोनों जेट्स में सर्विलांस का भरपूर इंतजाम

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चीन के J-20 में इंटरनल कैनन लगा है। इसमें AESA रडार लगा हुआ जो ट्रैक सेंसर से लैस है। चीन का दावा है इसमें पैसिव इलेक्‍टो-ऑप्टिकल डिटेक्‍शन सिस्‍टम भी है जिससे पायलट को 360 डिग्री कवरेज मिलती है। इस विमान से चीनी मिलिट्री सैटेलाइट्स और कई ड्रोन्‍स का डेटा एक्‍सेस किया जा सकता है। चीन इसमें PL-15 मीडियम-टू-लॉन्‍ग रेंज मिसाइल का टेस्‍ट कर चुका है। इस मिसाइल में जो रडार है उसकी रेंज 200 किलोमीटर से ज्‍यादा है। इसके मुकाबले भारत में राफेल बियांड विजुअल रेंज मिसाइल्‍स से लैस होकर आएगा। यानी बिना टारगेट प्‍लेन को देखते ही उसे उड़ाया जा सकता है। राफेल में ऐक्टिव रडार सीकर लगा है जिससे किसी भी मौसम में जेट ऑपरेट करने की सुविधा मिलती है। स्कैल्प मिसाइल या स्ट्रॉम शैडो जैसी मिसाइलें किसी भी बंकर को आसानी से तबाह कर सकती है। इसकी रेंज लगभग 560 किमी होती है। राफेल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है।

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