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सुनवाई में देर, जेल जाने के बाद मिली अग्रिम जमानत, सुप्रीम कोर्ट में 45 दिन बाद सूचीबद्ध हुई याचिका

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अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

Updated Sun, 18 Oct 2020 01:45 AM IST

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सुनने में यह भले अटपटा लगे, लेकिन सच है कि सुनवाई में देरी होने से एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत तब मिली जब वह जेल जा चुका था। तमिलनाडु के इस शख्स की अग्रिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में 45 दिन बाद सूचीबद्ध हुई तो कोर्ट ने कहा कि उसे गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि तब तक वह जेल जा चुका था।

जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ के समक्ष शुक्रवार को याचिका सूचीबद्ध थी। केस फाइल देखकर पीठ ने कहा कि अगर एक व्यक्ति पत्नी से विवाद नहीं सुलझा सका तो क्या उसे गिरफ्तार होन चाहिए? उस व्यक्ति के वकील को सुनने से पहले पीठ मान चुकी थी कि गिरफ्तारी से राहत मिलनी चाहिए। पीठ ने न केवल उसे गिरफ्तारी से राहत दी बल्कि उसकी पत्नी और तमिलनाडु पुलिस को नोटिस जारी किया।

इस पर याची के वकील ने मुवक्किल के जेल में होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया, 27 अगस्त को दाखिल अग्रिम जमानत याचिका 16 अक्तूबर को सूचीबद्ध हुई। वकील ने पीठ से यह निर्देश देने की गुजारिश की कि रजिस्ट्री अग्रिम जमानत याचिका जल्द सूचीबद्ध करे। प्रयास होना चाहिए कि आगे अग्रिम जमानत याचिका दायर करने वालों के साथ ऐसा न हो। इस पर पीठ ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि ‘अब इस याचिका को मतलब ही नहीं रह गया है।’ इसके बाद पीठ ने याची को गिरफ्तारी से संरक्षण देने का आदेश डिलीट करवाया। पीठ ने कहा कि ‘याची चाहे तो अब नियमित जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया सकता है।’

सुनने में यह भले अटपटा लगे, लेकिन सच है कि सुनवाई में देरी होने से एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत तब मिली जब वह जेल जा चुका था। तमिलनाडु के इस शख्स की अग्रिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में 45 दिन बाद सूचीबद्ध हुई तो कोर्ट ने कहा कि उसे गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि तब तक वह जेल जा चुका था।

जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ के समक्ष शुक्रवार को याचिका सूचीबद्ध थी। केस फाइल देखकर पीठ ने कहा कि अगर एक व्यक्ति पत्नी से विवाद नहीं सुलझा सका तो क्या उसे गिरफ्तार होन चाहिए? उस व्यक्ति के वकील को सुनने से पहले पीठ मान चुकी थी कि गिरफ्तारी से राहत मिलनी चाहिए। पीठ ने न केवल उसे गिरफ्तारी से राहत दी बल्कि उसकी पत्नी और तमिलनाडु पुलिस को नोटिस जारी किया।

इस पर याची के वकील ने मुवक्किल के जेल में होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया, 27 अगस्त को दाखिल अग्रिम जमानत याचिका 16 अक्तूबर को सूचीबद्ध हुई। वकील ने पीठ से यह निर्देश देने की गुजारिश की कि रजिस्ट्री अग्रिम जमानत याचिका जल्द सूचीबद्ध करे। प्रयास होना चाहिए कि आगे अग्रिम जमानत याचिका दायर करने वालों के साथ ऐसा न हो। इस पर पीठ ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि ‘अब इस याचिका को मतलब ही नहीं रह गया है।’ इसके बाद पीठ ने याची को गिरफ्तारी से संरक्षण देने का आदेश डिलीट करवाया। पीठ ने कहा कि ‘याची चाहे तो अब नियमित जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया सकता है।’

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