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Chapra Corona Update: छपरा सदर अस्पताल ने कहा- ‘आपको कोरोना है’, पटना एम्स ने कहा- ‘आप बिल्कुल ठीक हैं’

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डॉक्टर लालबाबू यादव

छपरा :

छपरा सदर अस्पताल में किए गए कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच रिपोर्ट को पटना एम्स ने जांच कर छपरा सदर अस्पताल की जांच रिपोर्ट को गलत साबित कर दिया है। इसका खुलासा पटना एम्स से वापस लौटे राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश उपाध्यक्ष सह सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी डॉक्टर लालबाबू यादव ने रविवार को किया।

उन्होंने बताया कि छपरा सदर अस्पताल में उनका सैंपल कलेक्शन किया गया, जिसमें उन्हें पॉजिटिव बताया गया और इलाज के लिए एम्स पटना रेफर कर दिया गया। जब वह एम्स में पहुंचे तो, वहां चिकित्सकों ने छपरा सदर अस्पताल की जांच रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया और दोबारा सैंपल कलेक्शन कर जांच किया।

एम्स में जांच मैं उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई, जिसके बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। आखिर क्या मामला है कि छपरा सदर अस्पताल की रिपोर्ट को पटना एम्स मानने से इंकार कर दिया। इस सवाल पर डॉ. लाल बाबू यादव ने बताया कि पटना एम्स में जांच करने पर उनकी रिपोर्ट निगेटिव हो गयी। इसके पहले भी कई मरीजों की रिपोर्ट गलत साबित हो चुकी है।

चिकित्सकों का कहना था कि छपरा सदर अस्पताल की जांच रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं है। इस घटना ने छपरा सदर अस्पताल में किए जा रहे जांच पर सवाल खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट नेगेटिव हो या पॉजिटिव बात जांच रिपोर्ट की प्रमाणिकता की है। जब पॉजिटिव रिपोर्ट एम्स में निगेटिव हो जा रही है तो, हो सकता है यहां आने वाली निगेटिव रिपोर्ट पॉजिटिव भी हो सकती है।

इस घटनाक्रम ने सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में ला दिया है तथा तमाम जांच रिपोर्ट की असलियत पर लोगों को संदेह होने लगा है। आखिर कौन सी ऐसी बात है, जिसके कारण छपरा सदर अस्पताल में जिस व्यक्ति को पॉजिटिव पाया जा रहा है। वह पटना एम्स में जाते ही नेगेटिव हो गया।

छपरा सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली पहले से ही सवालों के घेरे में रही है तथा यहां व्याप्त को कुव्यवस्था पर भी राजद नेता ने गंभीर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन द्वारा सैंपल कलेक्शन करने के बाद जब उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो, अस्पताल में बुलाया गया। वह दो घंटे तक जाकर अस्पताल में बैठे रहे, लेकिन किसी ने उनकी सुधि नहीं ली।

काफी प्रयास के बाद जब सिविल सर्जन पहुंचे तो, जो एंबुलेंस से उन्हें एम्स भेजने के लिए उपलब्ध कराया गया। उस एंबुलेंस की सफाई व धुलाई कई दिनों से नहीं हुई थी। खटारा हो चुके एंबुलेंस में बेड पर उन्हें लेटाने के बाद जैसे ही चालक ने स्टार्ट किया। वह दो बार बेड से नीचे गिर गए। अंत में थक हार कर उन्हें अपने निजी वाहन से एम्स जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की गलत कार्यप्रणाली के कारण न केवल उन्हें काफी फजीहत उठानी पड़ी है।

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