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सप्ताह में एक दिन दूध, एक बार दिया जा रहा काढ़ा

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Publish Date:Mon, 20 Jul 2020 06:14 AM (IST)

संवाद सहयोगी, रामगढ़ : सप्ताह में एक दिन दूध और सप्ताह में एक बार ही काढ़ा देकर कोरोना संक्रमितों का इलाज किया जा रहा है। सरकारी कोविड अस्पतालों में अव्यवस्था की यह बानगी है। वर्तमान में जिले में दो सरकारी कोविड अस्पताल संचालित किए गए हैं। इनमें ओल्ड एज होम पहले से संचालित है। इधर, पीएचसी भुचुंगडीह में 22 मरीजों को शिफ्ट कर दिया गया है। जब जिला मुख्यालय में सटे कोविड अस्पताल की यह स्थिति है तो दूर स्थित पीएचसी भुचुंगडीह में क्या स्थिति होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। अस्पतालों में न तो चिकित्सक जाते हैं और न ही कोई नर्स या अन्य कोई स्वास्थ्यकर्मी। केवल अस्पताल के बाहर के पुलिस के जवान व मजिस्ट्रेट को तैनात कर दिया गया है। अगर मरीज खुद से ठीक हो गया तो ठीक है वरना उसका तो ईश्वर ही मालिक है। अगर सरकारी कोविड अस्पताल में किसी भी मरीज की स्थिति बिगड़ी तो उसे कौन संभालेगा, आक्सीजन आदि की जरूरत पड़ी तो उसे कैसे उपलब्ध कराया जाएगा। इसे सोचकर अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन बेहाल हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान संक्रमण को दूर करना है यह भी देखना है कि संक्रमण को रोकने के लिए सैनिटाइजेशन की व्यव्स्था दुरुस्त हो। इसके इतर अस्पताल में भर्ती मरीजों की बेडशीट तक चेंज नहीं की जाती। अस्पताल में साफ-सफाई का हाल भी बेहद खराब है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ मरीजों के परिजनों ने बताया कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान आपदा में अवसर ढूंढ़ने की बात को गलत अर्थाें में लिया जा रहा है। मरीजों के साथ पूरी तरह से लापरवाही बरती जा रही है। मरीजों को मिलने वाले पौष्टिक भोजन में भी डाका डाल रहे हैं। इसके ठीक विपरीत केंद्रीय चिकित्सालय नई सराय में मरीजों की बेहतर देखभाल की जाती है। खाने में पौष्टिक आहार के रूप में प्रतिदिन बढि़या दूध, अंडा, फल, गर्म चाय आदि देने के साथ-साथ चिकित्सक व नर्स आदि सदैव तत्पर रहते हैं। इसकी चर्चा अस्पताल में भर्ती मरीज खुले मन से करते हैं।

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एक सप्ताह बाद भी नहीं मिल पाई जांच रिपोर्ट

रामगढ़ : जिले में कुछ मामलों में लापरवाही अपने चरम पर है। किसी भी व्यक्ति के पेड क्वारंटाइन व सरकारी क्वारंटाइन में रहने के बावजूद एक सप्ताह तक जांच रिपोर्ट नहीं आई। जिले के एक सरकारी कर्मी के साथ हुए घटनाक्रम पेशानी पर बल लाने को काफी हैं। बताया जाता है कि सरकारी कर्मी अपने पूरे परिवार के साथ जांच कराई। खुद पति पत्नी अपने सरकारी आवास में क्वारंटाइन हो गए और उनके बेटे और बहू पेड क्वारंटाइन में। जब एक सप्ताह तक जांच रिपोर्ट नहीं आई तो उन्होंने आला अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन उन्हें वहां भी फटकार मिली। जब उन्होंने अपने रिश्तेदार जो दूसरे जिले में सरकारी चिकित्सक हैं, उनके माध्यम से पता करवाया तो पता चला कि एक सप्ताह बाद भी जांच का नमूना रांची गया ही नहीं। सरकारी कर्मचारी ने अपने सरकारी रिश्तेदार की पूैरवी के बूते किसी तरह जांच का नमूना रामगढ़ से रांची भिजवाया। इसके बाद जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। लेकिन पेड क्वारंटाइन में उनके हजारों रुपये खर्च हो गए। लोग बाग अब यह चर्चा करने लगे हैं कि जब सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों की यह दुर्दशा होगी तो आम लोगों की हालत का अंदाजा ही लगाया जा सकता है। सदर अस्पताल में कुछ मामलों में चिकित्सकों से लेकर स्वास्थ्यकर्मियों तक ने भारी लापरवाही बरती।

Posted By: Jagran

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