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अनलॉक में भी नहीं लौटे पटना के 8 लाख लोग, इनमें से 5 लाख तो कोचिंग-स्कूल से जुड़े हुए हैं

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पटना2 घंटे पहले

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  • 3 हजार से अधिक घर और 400 से अधिक बड़े हॉस्टल खाली, शिक्षा से जुड़े कारोबार में 80% तक गिरावट
  • चिंता : 2 लाख कामगार भी अब तक नहीं लौटे हैं पटना, उम्मीद : स्कूल और कोचिंग खुलने के बाद लौटेगी रौनक

(मो. सिकन्दर) लॉकडाउन की बंदिश के दायरे में आने वाले 90% सेक्टर भले ही खुल गए हों लेकिन जो पटना छोड़ गए, वे अभी लौटे नहीं। मार्च से 5 सितंबर के बीच शहर छोड़ने और नहीं लौटने वालों की संख्या करीब 8 लाख है। इनमें अधिकांश वह हैं जिनकी लॉकडाउन में या तो नौकरी चली गई या उनके संस्थान, खासकर कोचिंग-स्कूल आदि अभी तक खुले ही नहीं।

परिवहन क्षेत्र और जिला प्रशासन के जानकारों की मानें तो पटना नगर निगम क्षेत्र की आबादी 22 लाख है। लॉकडाउन से पहले करीब 4 लाख लोग रोज कमाई, दवाई, पढाई-लिखाई, कोर्ट-कचहरी, घूमने-फिरने शहर आते थे। इनमें करीब दो लाख वापस हो जाते थे और दो लाख एक-दो दिन बाद लौटते थे।

फिलहाल आने-जाने वाली 4 लाख की आबादी में से भी अब एक लाख ही रह गई है। राजधानी से हुए इस रिवर्स माइग्रेशन का असर चौतरफा पड़ा है। सबसे बड़ा झटका शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कारोबार पर पड़ा है क्योंकि शहर छोड़ने वालों में सबसे बड़ी संख्या छात्रों की ही है।

चिंता की ये तस्वीर अब भी…क्योंकि, शहर की एक तिहाई आबादी नहीं आई

5,00,000 शिक्षा जगत और 200000 कामगार

  • स्कूल कॉलेज, कोचिंग संस्थान बंद हैं। करीब 5 लाख छात्र, टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टाफ के अलावा कोचिंग के आसपास के दुकानदार पटना से चले गए।
  • सेल्समैन, होटल, जिम, ढाबा, रेहड़ी, पटरी वाले, लांउड्री, जिम, दिहाड़ी, बिजली, राजमिस्त्री समेत अन्य सेक्टरों के करीब दो लाख नहीं लौटे हैं।

20,000 ऑटो चालक: करीब 40 हजार ऑटो हैं। अभी भी करीब 20 हजार ऑटो चालक पटना नहीं लौटे हैं। जो ऑटो चला भी रहे हैं उन्हें पैसेंजर नहीं मिल रहे।
22,000 दुकानदार: करीब 45 हजार फुटपाथ दुकानदार हैं पटना में। 50 फीसदी नहीं लौटे हैं । जो फुटपाथ पर दुकान चला रहे हैं उनकी बिक्री भी 50 फीसदी तक ही है।

600 वकील परिवार: करीब 40 हजार ऑटो हैं। अभी भी करीब 20 हजार ऑटो चालक पटना नहीं लौटे हैं। जो ऑटो चला भी रहे हैं उन्हें पैसेंजर नहीं मिल रहे।

हर क्षेत्र पर दिख रहा असर

कोराना की वजह से शहर छोड़ गई बड़ी आबादी का सीधा असर आम लोगों व छात्रों जुड़े जरूरी आइटम के कारोबार पर पड़ा है। लोग मकान खाली कर चले गए। स्कूल-कॉलेज व कोचिंग बंद रहने से छात्र हॉस्टल खाली कर गए। स्टेशनरी, किताब, गार्मेंटस सेक्टर हो या खाद्यान्न व्यवसाय पर बुरा असर पड़ा है।

शिक्षा से जुड़े कारोबार में 80% गिरावट
छात्रों की जरूरत से जुड़ी चीजों के बिजनेस पर 80% की कमी आ गई है। खजांची रोड में कॉपी, कलम व स्टेशनरी सामान के थोक विक्रेता मिलन स्टोर के मालिक मो. अहसान का कहना है कि कोचिंग, कॉलेज, स्कूल व दूसरे शैक्षिक संस्थानों के बंद रहने से 30% भी बिक्री नहीं हो रही है। नीट व जेईई के दौरान कुछ सेल बढ़ा था पर फिर वही हालत हो गई है। छात्र हैं ही नहीं तो बिक्री कैसे होगी।

हकीकत जाने के लिए भास्कर टीम ने शहर की पड़ताल के साथ ही जिला प्रशासन और नगर निगम के अफसरों-कर्मचारियों, कोचिंग एसोसिएशन ऑफ बिहार के सदस्य रंधीर कुमार गांधी ,बिहार राज्य ऑटो रिक्शा चालक संघ के महासचिव मो. मुर्तजा, फुटपाथ दुकानदारों का संघ टाउन लेवल फेडरेशन के सचिव मो. शहजादे, पटना सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव राजेश कुमार, इंटक के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रप्रकश सिंह से भी की पुष्टि।

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