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मेडिकल जांच पर उठ रहे सवाल, यूपी से लोग एसडीयू इंचार्ज को फोन कर पूछ रहे- ऐसी बर्बता क्यों की

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यमुनानगरएक घंटा पहले

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हिमांशु का फाइल फोटो।

  • ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टर के मेडिकली फिट बताने पर ही उसे कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा था
  • मजिस्ट्रेट जांच में पुलिस कर्मचारी डॉक्टर के मेडिकल को रखेंगे अपनी तरफ से सबूत के तौर पर

जेल में यूपी निवासी हिमांशु पंवार की मौत के मामले में मेडिकल जांच में लापरवाही बरतने की बात भी सामने आ रही है। वहीं जांच के कटघरे में स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट ही नहीं मेडिकल जांच करने वाला डॉक्टर और करनाल और यमुनानगर जेल प्रशासन भी है। हिमांशु को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश करने से पहले पुलिस उसे सिविल अस्पताल में मेडिकल जांच कराने ले गई थी। वहां डॉक्टर ने उसे फिट करार दिया था।

मेडिकल की डिटेल पुलिस को सौंप दी। पुलिस ने रिपोर्ट कोर्ट में रखी, जिसे जज ने देखकर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ऐसी बात भी सामने आ रही है कि जब पुलिस उसे मेडिकल जांच के लिए लेकर गई थी तब पुलिस साथ होने से वह डॉक्टर को अपने शरीर पर लगी चोटों को नहीं दिखा पाया था। हालांकि एसडीयू इंचार्ज जोगिंद्र सिंह कह चुके हैं कि उन्होंने कोई चोट नहीं मारी। इसका पुख्ता आधार उनके पास सरकारी डॉक्टर की रिपोर्ट है। उधर, गुर्जर समुदाय के युवकों ने एक शिकायत प्रदेश के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भेजी है।

उन्होंने टॉर्चर करने वाले पुलिस वालों पर कार्रवाई और परिवार को 50 लाख मुआवजा देने की भी मांग की है।पुलिस जांच में डॉक्टर के मेडिकल को आधार बनाने की तैयारी में| हिमांशु के शरीर पर जो चोटें थी, वह पुलिस ने नहीं मारी, इसे साबित करने में पुलिस लगी है। इसके लिए पुलिस सिविल अस्पताल के डॉक्टर के उस मेडिकल जांच को आगे रख रही है जिसमें डॉक्टर ने कहा कि हिमांशु को बाहरी और अंदरुनी कोई चोट नहीं है। इसे पुलिस अपने बचाव में मजिस्ट्रेट जांच में रख सकती है।

हिमांशु की जेल में मौत के बाद यूपी में गुर्जर समाज के लोग गुस्से में है। यूपी के बहादुरपुर निवासी अमित चौधरी ने स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट के इंचार्ज जोगिंद्र सिंह के पास फोन किया। इस दौरान दोनों के बीच बहस भी हुई। वहीं फोन करने वाले ने कहा कि उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। अगर उसमें पुलिस मारपीट से चोटें की बात आती है तो वे सड़कों पर उतरेंगे। हिमांशु के साथ हुई बर्बता का हिसाब उन्हें देना होगा।

यह है पूरा मामला

यूपी निवासी हिमांशु पंवार को स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट ने बाइक चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। बाद में उसे कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उसे करनाल जेल भेजा गया था। उसकी कोरोना रिपोर्ट आने पर उसे यमुनानगर जेल भेज दिया गया था। यहां पर 17 सितंबर रात को उसकी हालत बिगड़ी तो यमुनानगर सिविल अस्पताल में उसे लाया गया था। यहां पर उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया है कि स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट ने उसे हिरासत में पीटा। उसकी वजह से उसकी मौत हुई। हिमांशु की जांघ और शरीर पर कई जगह मांस उतरा हुआ मिला है।

पुलिस हर दिन किसी ने किसी केस में आरोपियों का मेडिकल कराने आती है। डॉक्टर आरोपी से जरूर पूछता है कि उसे कहीं कोई चोट तो नहीं लगी। आरोपी के बताने पर ही मेडिकल जांच होती है। डॉ. सुनील कुमार, एमएस।

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