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लोकसभा से पास हुए दो नए विधेयक, जमकर हुआ हंगामा, जानें इन बिलों का आपसे क्या सरोकार

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हाइलाइट्स:

  • लोकसभा ने शनिवार को दो नए बिलों को दी मंजूरी, कंपनी बिल और टैक्सेशन बिल पास
  • कंपनी ऐक्ट के दायरे में सिर्फ बड़ी कंपनियां नहीं, बल्कि छोटे-छोटी कंपनियां भी: वित्त मंत्री
  • कोरोना संकट के समय गरीबों के बजाय सूट-बूट वालों को मदद कर रही सरकार: कांग्रेस

नई दिल्ली
लोकसभा ने शनिवार को ‘कंपनी (संशोधन) विधेयक-2020’ और ‘कराधान और अन्य विधियां (कतिपय उपबंधों का संशोधन एवं छूट) विधेयक’ को मंजूरी दे दी। कंपनी (संशोधन) विधेयक-2020 के तहत जहां कुछ अपराधों को आर्थिक जुर्म की श्रेणी से बाहर निकाला गया है, वहीं कराधान और अन्य विधियां (कतिपय उपबंधों का संशोधन एवं छूट) विधेयक के तहत कोविड-19 महामारी के मद्देनजर कर अदा करने की समय-सीमा बढ़ाने, पीएम केयर्स फंड के लिए टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। इसी के साथ लोकसभा रविवार 3 बजे तक के लिए स्थगित हो गई।

कंपनी (संशोधन) विधेयक-2020 विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि गंभीर किस्म के आपराध आर्थिक जुर्म की श्रेणी में पहले की तरह बने रहेंगे। सीतारमण ने कहा कहा कि इस अधिनियम के दायरे में सिर्फ बड़ी कंपनियां नहीं, बल्कि छोटे-छोटी कंपनियां भी हैं। उन्होंने कहा कि ‘गैर-समाधेय (नॉन कंपाउंडेबल) अपराधों को आर्थिक जुर्म की श्रेणी से बाहर नहीं रखा गया है। इस तरह के अपराधों की संख्या 35 थी और आज भी यही रहेगी।

कांग्रेस बोली- सूट-बूट वालों को मदद कर रही सरकार
‘कंपनी (संशोधन) विधेयक-2020 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि कोरोना संकट के समय गरीबों के बजाय सूट-बूट वालों को मदद दी जा रही है। इससे साबित होता है कि इस सरकार की प्राथमिकताएं कतार के आखिरी आदमी के लिए नहीं, बल्कि पूंजीपतियों के लिए हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक और पिछले दिनों लोकसभा से पारित किए गए कृषि संबंधी विधेयकों का मकसद बड़े बड़े औद्योगिक घरानों को खेती और किसानी में आमंत्रित करना है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार की मंशा है कि कॉर्पेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) को कमजोर किया जाए।

CSR में पारदर्शिता सुनिश्चित करे सरकार: TMC
चर्चा में हिस्सा लेते हुए बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने साबित किया है कि वह मुश्किल समय में भी प्रभावी कदम उठाती है। उन्होंने कहा कि विधेयक को तैयार करने की प्रकिया में सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत चर्चा की गई। अपराजिता ने कहा कि इस संशोधन विधेयक से कारोबारी सुगमता को बढ़ावा मिलेगा और निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा। बीजेपी सदस्य ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से सीएसआर से जुड़ी पहल को बल मिलेगा। तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने कहा कि सरकार को सीएसआर में ज्यादा पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।

कॉर्पेरेट को मिलेंगी क्या सुविधाएं: गौरव गोगोई
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के कोटागिरी श्रीधर ने कहा कि आंध्र प्रदेश को बकाये की राशि प्रदान की जाए। शिवसेना के अरविंद सावंत ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि स्टार्ट अप पर इतना बड़ा निवेश हुआ है तो परिणाम क्या निकला है। बीएसपी सांसद मलूक नागर ने कहा कि सरकार ने कोरोना संकट के समय कारोबार को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए हैं क्योंकि इस वक्त लोगों को नौकरियों की जरूरत है। कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार से यह पूछना चाहिए कि वह कॉर्पेरेट जगत को कितनी सुविधाएं देगी।

जनता को मिलेगी तुरंत राहत: सीतारमण

दूसरी ओर कराधान और अन्य विधियां (कतिपय उपबंधों का संशोधन एवं छूट) विधेयक में रिटर्न जमा करने की समय अवधि बढाने, आधार को पैन से जोड़ने जैसे विषय शामिल हैं। इससे संबंधित कराधान और अन्य विधियां (कतिपय उपबंधों का संशोधन एवं छूट) अध्यादेश 2020 मार्च में लागू किया गया था। चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 के समय में लोगों के लिए अनुपालन समय सीमा से संबंधित विषय थे जिसमें रिटर्न फाइल करना, जीएसटी रिटर्न फाइल करने जैसे मुद्दे थे। उन्होंने कहा कि क्योंकि लॉकडाउन के दौरान लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता था, इसके लिए तिथियों को स्थगित करने की जरूरत थी। इसके मद्देनजर ही अध्यादेश लाना पड़ा और इस अध्यादेश के लिए विधेयक लाना पड़ा। यह जनता को तुरंत राहत देने के लिए जरूरी था।

विपक्ष बोला- पारदर्शिता की कमी
सीतारमण ने कहा कि कोविड संकट के कारण हमें अध्यादेश लाना पड़ा। कानूनी आवश्यकता थी। जनता को तुरंत राहत देनी थी। ऐसे में यह अध्यादेश लाया गया ताकि कर जमा करने में देरी पर जुर्माना नहीं लगे क्योंकि पहले के अधिनियम में जुर्माने की व्यवस्था थी। सीतारमण ने कहा कि राजस्व सेवा के अधिकारी जान खतरे में डालकर काम कर रहे हैं और किसी एक मामले को लेकर सभी के बारे में एक राय नहीं बनाई जा सकती। चर्चा के दौरान कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने लोकसभा में पीएम केयर्स फंड के गठन का विरोध किया और आरोप लगाया कि इसमें पारदर्शिता की कमी है।

अपने घर से शुरू करें पारदर्शिता: सीतारमण
विपक्ष के आरोपों को लेकर वित्त मंत्री सीतारमण ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की पूरी कोशिश है कि कर प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहती हूं कि पारदर्शिता अपने घर से शुरू करिए और अपनी परमार्थ संगठनों में पारदर्शिता लाइए। सीतारमण ने कहा कि पीएम केयर्स पंजीकृत है, लेकिन प्रधानमंत्री राहत कोष पंजीकृत नहीं है। उन्होंने कहा कि पीएम केयर्स फंड और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष दोनों की ऑडिट एक ही एजेंसी करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की 1985 के बाद से एक भी बैठक नहीं हुई है। वित्त मंत्री ने कहा कि जहां तक प्रबंधन का सवाल है, पीएम केयर्स फंड में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री पदेन सदस्य होते हैं। इसके अलावा भी अलग अलग क्षेत्र से कुछ प्रबुद्ध लोग भी पदेन सदस्य होते हैं। जबकि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में अध्यक्ष होते हैं। इसके अलावा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष ट्रस्टी होते हैं।

PM राहत कोष में क्यों रहे कांग्रेस का ही सदस्य: वित्त मंत्री
सीतारमण ने सवाल किया कि जब देश में हजारों राजनीतिक दल हैं तब कांग्रेस का ही सदस्य क्यों रहे। यह सवाल भी पूछना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री राहत कोष और पीएम केयर्स कोष दोनों पर आरटीआई लागू नहीं होता, लेकिन आप सिर्फ पीएम केयर्स की बात करते हैं। गौरतलब है कि यह विधेयक इस वर्ष मार्च में लाए गए अध्‍यादेश की जगह लेगा जिसमें छूट देते हुए कर अदा करने की समय-सीमा बढ़ा दी गई थी और कुछ कानूनों के तहत लगने वाले जुर्माने माफ कर दिए गए थे।

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