Advertisements
Home राज्यवार बिहार बिहार के 10 जिलों के 61 गांवों से रिपोर्ट: जिन कंपनियों ने...

बिहार के 10 जिलों के 61 गांवों से रिपोर्ट: जिन कंपनियों ने श्रमिकों को भगाया अब वे ही बुला रहे हैं, डेढ़ गु… – Dainik Bhaskar

Advertisements
  • Hindi News
  • Db original
  • Lockdown Report From Bihar : Maximum Migrants Are Willing To Return Other State For Job

पटना20 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

तस्वीर बिहार के कटिहार जिले की है। जहां प्रवासी मजदूरों को वापस ले जाने के लिए एसी बस लगी हुई है।

  • दैनिक भास्कर की 9 टीमें उन 10 जिलों के 61 गांवों में पहुंची जहां सबसे ज्यादा प्रवासी लौटे थे, इनमें 7 जिलों के गांवों से औसतन 50% से अधिक लोग वापस काम पर लौट चुके हैं
  • 90 फीसदी लोगों ने कहा कि अब फैक्ट्री मालिक और खेती कराने वाले पहले से ज्यादा पैसा दे रहे हैं, लौटने का खर्च और बकाया भी, इसलिए वापस जाना चाहते हैं

25 मार्च को पहली बार लॉकडाउन के बाद हजारों किमी पैदल चलकर लौटने वाले श्रमिक अब वापस काम के लिए अलग-अलग राज्यों में लौटने लगे हैं। कोरोना के खतरे के बावजूद। कारण, जिन कंपनी वालों ने, मालिकों ने लॉकडाउन में काम बंद होने पर उन्हें वेतन और आश्रय देने से मना कर दिया था, अब वही उन्हें 20 हजार रुपए एडवांस, डेढ़ गुना पगार के साथ लौटने के लिए एसी बसें भी भेज रहे हैं। इसके पीछे मुख्य वजह राज्य सरकार की ओर से इन प्रवासी श्रमिकों के लिए लाई जा रही योजनाएं हैं। जिनके कारण अब काफी संख्या में प्रवासी वापस नहीं जाने का मन बना चुके हैं।

दैनिक भास्कर की 9 टीमें उन 10 जिलों के 61 गांवों में पहुंची, जहां सबसे अधिक प्रवासी लौटे थे। इनमें 7 जिलों के गांवों से औसतन 50% से ज्यादा लोग वापस काम पर लौट चुके हैं। कुछ जो लौटे हैं, उनकी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं कि दिल्ली-पंजाब-तेलंगाना आदि में काम कैसा चल रहा।

उसी के मुताबिक, वे भी अपना जाने का प्रोग्राम बनाएंगे। कई ऐसे हैं, जिन्हें अपने गांव में ही काम मिल गया और कई अभी अपने गांव-क्षेत्र में ही काम का रास्ता देख रहे हैं। उनका कहना हैं कि हमारी पूरी कोशिश होगी कि लौटना न पड़े। अभी मनरेगा में काम मिल रहा है, लेकिन हम साल के 365 दिन का काम चाहते हैं। 

पूर्णिया के धीमा में तालाब निर्माण करते मजदूरों में ज्यादातर बाहर से लौटे हैं।

ज्यादातर लोगों का मानना है कि सरकार अच्छा प्रयास कर रही है, लेकिन परदेस जैसी कमाई यहां मुश्किल है। 90 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अब फैक्ट्री मालिक और खेती कराने वाले पहले से ज्यादा पैसा दे रहे हैं। लौटने का खर्च और पिछला बकाया भी। इसी कारण अभी परिवार यहीं छोड़कर जा रहे हैं। अगर सब ठीक रहा तो परिवार भी ले जाएंगे। नहीं तो फिर लौटकर तो आना ही है।

अररिया/ पूर्णिया ः लगभग 300 मजदूर लौटे हैं, कुछ और भी लौटना चाहते हैं

अररिया के भरगामा, धनेसरी, रानीगंज से एसी बसों में कितने लोग लौटे, इसका सरकारी रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन गांव वाले नाम गिनाते जाते हैं। बताते हैं- “बुलाने वाले ने एडवांस में 20-20 हजार रुपए तक दिए। जिन्हें अच्छा लगा- निकल पड़े पिछला दर्द भूलकर।” वैसे, सीमांचल में मनरेगा से मिली राहत दिखती है। बिजली कंपनियों ने भी बड़ी संख्या में लोगों को काम दिया है।

लेकिन, इन सभी पर परदेस के ऑफर भारी हैं। भरगामा आसपास के 50 श्रमिकों ने बताया कि बड़ी संख्या में मजदूर लौट रहे हैं। इन्होंने कहा- “दिल्ली में फैक्ट्री खुल गई है, बुलावा आ रहा है।” भटगामा बाजार में 20-25 मजदूरों से बात हुई तो कहा- “लगभग 300 मजदूर लौटे हैं। कुछ और भी लौटना चाह रहे हैं।” पूर्णिया के कृत्यानंद नगर में मिले मनीष, अमित, श्रवण, धीरज, अखिलेश काम नहीं मिलने से परेशान तो हैं, लेकिन भरोसा है कि बिहार में ही काम मिल जाएगा।

किशनगंज ः यहां काम नहीं मिला तो वापस दिल्ली लौट जाएंगे

तीन गांवों में 150 लोगों से मुलाकात हुई। बहादुरगंज में मिले मजदूरों ने कहा- “हाथों में हुनर है, लेकिन काम नहीं मिल रहा। बाहर थे तो कमाकर भेजते थे। अभी खुद बोझ हैं। मनरेगा से काम मिलता है, मगर रोज नहीं और पैसे भी कम हैं।” तारिक, फैजान, रुस्तम, साकिब, दिलशाद, नजीम कहते हैं कि ढंग का काम मिला तो जरूर रुकेंगे, नहीं तो दिल्ली वापस लौट जाएंगे।

नौतन प्रखंड के प्रवासी मजदूरों की तस्वीर। इनमें से ज्यादातर लोग वापस लौटना चाहते हैं।

बेतिया ः कई लोग पंजाब जाना चाहते हैं

13 गांवों के 250 लोगों ने जब लॉकडाउन में अपने लौटने की कहानी सुनाई तो हमारी भी आंखें नम हो गई। उन्होंने कहा कि- भूख और कोरोना में से एक को चुनने की बारी आई तो हमने कोरोना को चुना, इससे बड़ी बीमारी कोई नहीं। इन लोगों से भास्कर टीम ने आग्रह किया कि कुछ ऐसे लोगों से बात करवाएं जो दूसरे राज्यों में दोबारा काम पर लग चुके हैं।

नवलपुर बलुआ के भूटन राम ने पटियाला से मोबाइल पर कहा- “वहां खेत पर काम कर रहा है। कीमत पहले से अधिक। कोरोना का डर अभी मालिक और श्रमिक दोनों को है…लेकिन मजबूरी दोनों की है। अब काफी लोग उनके पास (पंजाब) जाना चाहते हैं।”

मोतिहारी ः लोगों को इस बात का डर है कि पुरानी नौकरी मिलेगी कि नहीं
यहां अलग-अलग गांवों के 125 लोगों से बातचीत की। ढाका प्रखंड में पचपकड़ी पंचायत के रूपौलिया गांव में मिले डेढ़ दर्जन से ज्यादा मजदूरों ने फिर से वापस जाने की बात कही। हरिशंकर प्रसाद, श्यामदेव पासवान ने कहा- जहां-तहां दुकान लगाकर परिवार चलाते थे, अब दिनभर इस चिंता में अकेले बैठे रहते हैं।

राम जायसवाल, आशिफ आलम, शाह आलम, मंगल प्रसाद, विनय पासवान, मो. अल्लाउद्दीन…कोरोना से ज्यादा भूख से डरे हुए हैं। पताही के नोनफोरवा में मिले विजय सिंह ढाई महीने से बेकार बैठे हैं। उन्हें इस बात का भी डर है कि लौटे तो उन्हें पुरानी नौकरी भी मिलेगी या नहीं।

कटिहार के कुरसेला में मनरेगा के तहत काम करते प्रवासी मजदूर।

मधुबनी : हुनर मुताबिक काम मिलने में समय तो लगेगा

जयनगर प्रखंड के डोरवार पंचायत में आए 200 लोगों में से शायद ही कोई घर चला पाने की स्थिति में है। लेकिन लोग कहते हैं कि हुनर के मुताबिक काम मिलने में थोड़ा समय तो लगेगा, लेकिन उतने दिन कटेंगे कैसे? बेंगलुरू में कैंटीन लाइन में काम करने वाले रवि साह, पप्पू पूर्वे, गोवा में चाट काउंटर लगाने वाले पिंटू पूर्वे, मुंबई में वेल्डर का काम करने वाले शिव कुमार मुखिया हों या गुजरात, चंडीगढ़ में पलदारी करने वाले ललन मुखिया, देलचन मुखिया, सूरज नारायण यादव- हरेक के सामने संकट है। दिल्ली में फेरी लगाने वाले सियाशरण यादव, मुंबई में मजदूरी करने वाले विश्वनाथ मुखिया, शिव मुखिया और गुजरात से लौटे तेजीलाल मुखिया कहते हैं कि “बच्चों के लिए कई बार दूध तक नहीं हो पाता।

कटिहार ः लगभग 500 मजदूर सूरत और दिल्ली लौट चुके हैं

मनरेगा से मजदूरी और जीविका की मदद से काम चला रहे हैं, लेकिन लगभग सभी की नजर वापसी पर ही है। चांदी पंचायत में मिले 125 लोगों में से नयाटोला के मेहरूल, गनी, जालिम, मिनहाज, इस्तेखार, अब्दुल मतीन, जब्बार बताते हैं कि जॉब कार्ड तो बना, मजदूरी भी मिली, लेकिन परदेस जैसी कमाई यहां कहां है। बलरामपुर के आबादपुर और शिकारपुर पंचायत से लगभग 500 मजदूर सूरत और दिल्ली लौट चुके हैं। 

बोचहां प्रखंड मुख्यालय पर काम मांगने के लिए पहुंचे प्रवासी मजदूर।

मुजफ्फरपुर ः ज्यादातर लोगों ने गांव में रहकर सब्जी बेचने की बात कही

अनलॉक-1 में पंजाब-हरियाणा से गाड़ियां आकर मीनापुर, मोतीपुर और औराई प्रखंड से काफी संख्या में मजदूरों को ले गईं। जाने वालों को बस समय का इंतजार है। बंदरा प्रखंड के तेपरी गांव में दो दर्जन लोगों से बात हुई। मुंबई से लौटे अमरजीत और विकास 6 लोगों का परिवार नहीं चला पा रहे। हरियाणा में टाइल्स मिस्त्री रहे रजनीश कुमार हालत में सुधार का इंतजार कर रहे हैं।

साहेबगंज प्रखंड के जीता छपरा गांव के कौलेश्वर पंडित कहते हैं- “राजस्थान में 15 हजार रुपए महीने का मिलता था, खाना-कमरा फ्री था। वहां से फिर बुलावा है, लेकिन कोरोना में कैसे जाएं। चले भी जाएं और फिर लॉकडाउन हो गया तो क्या करेंगे। बोचहां प्रखंड के सरफुद्दीनपुर समेत आसपास के 5 गांवों में 150 लोगों में से अधिकतर ने सब्जी बेचकर गुजारा करने की बात कही।”

दरभंगा ः लोगों का कहना है कि सरकार यहीं काम दिला दे तो बेहतर होगा

भास्कर की टीम ने यहां चार प्रखंडों के लोगों से बात की। लोगों ने बताया कि 194 रुपए का काम, वह भी रोज नहीं। इसलिए, लोग टूट जा रहे हैं। जिसे बुलावा आ रहा, निकल जा रहा। सदर प्रखंड के अतिहर गांव में मंदिर पर 50-60 मजदूर मिले। ललन, ध्यानी, रामचंद्र, लक्ष्मी, रामउद्गार, सुबोध, रमेश, संतोष मंडल सभी ने कहा- जल्दी काम नहीं मिला तो परदेस जाना ही पड़ेगा।

हर बाढ़ को झेलने वाले कुशेश्वरस्थान प्रखंड में अलग- अलग जगहों पर 250 लोगों से बात हुई। बहादुरपुर प्रखंड के उसमामठ गांव में मिले 70 लोगों ने कहा कि काम ही नहीं मिल रहा। कई लोगों ने कहा कि सरकार यहीं काम दिला दे तो बेहतर होगा।

गया में भास्कर टीम से बात करते श्रमिकों के परिजन। दुबहल गांव में लौटे 65 श्रमिक फिर वापसी की तैयारी में हैं।

गया ः यहां के ज्यादातर प्रवासी वापस लौटना चाहते हैं

सारा दुख- पीड़ा भूल मजदूर फिर परेदस जाने की तैयारी में हैं। छह गांवों के 250 लोगों से बातचीत में यही निकला। भास्कर टीम जब गुरारू प्रखंड के बरोरह और डबूर पंचायत मुख्यालय पहुंची तो प्रवासी मजदूरों का डाटा अपलोड कैंप लगा था। लुधियाना से अंबा गांव लौटे संजीव कुमार ने कहा- “वहां रोज 600 रुपए कमाता था। यहां संभव नहीं दिख रहा” डबूर गांव के विनय पाल को भी नोएडा जाना है, स्थिति सुधरे तो। रौंदा निवासी मनीष और उसकी पत्नी दिव्यांग हैं। दोनों फिर दिल्ली जाना चाह रहे हैं। इमामगंज प्रखंड के दुबहल गांव में लौटे 65 श्रमिक फिर वापसी की तैयारी में हैं। 

0

Source link

Advertisements

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Advertisements

लोकप्रिय

बगहा में बनेगा रैक प्वाइंट, रेल अधिकारियों ने मिल प्रबंधन से की बातचीत

Publish Date:Sun, 20 Sep 2020 12:11 AM (IST) बगहा । बगहा में रैक प्वाइंट का निर्माण होगा। इसको लेकर रेलवे प्रशासन में सुगबुगाहट प्रारंभ हो...

अनलॉक में भी नहीं लौटे पटना के 8 लाख लोग, इनमें से 5 लाख तो कोचिंग-स्कूल से जुड़े हुए हैं

पटना2 घंटे पहलेकॉपी लिंक3 हजार से अधिक घर और 400 से अधिक बड़े हॉस्टल खाली, शिक्षा से जुड़े कारोबार में 80% तक गिरावटचिंता :...