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क्‍या आप नोएडा, ग्रेटर नोएडा की सोसायटी में रहते हैं? यूपी रेरा ने बनाए ये नए नियम

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ग्रेटर नोएडा
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद समेत प्रदेश भर की आवासीय सोसायटियों में बिल्डर और रेजिडेंट्स के बीच होने वाले विवादों को समाप्त करने के लिए यूपी रेरा ने पहल की है। इसके लिए आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट्स वेलफेयर असोसिएशन) और एओए (अपार्टमेंट ओनर्स असोसिएशन) के गठन और परियोजनाओं के रखरखाव संबंधी गाइडलाइंस तैयार की गई है। इसके तहत रेरा की तकनीकी टीम निर्माण के दौरान परियोजना की निगरानी करेगी। बाद में बायर सवाल नहीं उठाएंगे। इसके लिए बिल्डर और बायर के बीच रेरा सख्त करार कराएगी। पांच साल तक स्ट्रक्चर में कमी के लिए बिल्डर जिम्मेदार होंगे।

रेरा ने परियोजना की मेंटीनेंस और एओए व आरडब्ल्यूए के संबंध में सभी पक्षों से राय लेकर गाइडलाइंस बनाई गई है। इसके अनुसार एओए की ओर से टेकओवर होने तक डिवेलपर ही शुल्क वसूल कर मेंटीनेंस कार्य करता रहेगा। कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के एक साल तक डिवेलपर मेंटीनेंस करेगा। एक साल बाद भी अगर एओए परियोजना को टेकओवर नहीं करती है तो दस प्रतिशत मेंटीनेंस चार्ज बढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए डिवेलपर को अलग से बैंक अकाउंट खुलवाना होगा। इसी में ये रकम रखनी और यहीं से खर्च करनी होगी। एओए का गठन होने के बाद प्रमोटर को खर्च के बाद अकाउंट में बची रकम संबंधित एओए के हैंडओवर करनी होगी। हैंडओवर से पहले प्रमोटर की ओर से सभी तरह के बकाया चुकाने होंगे। इनमें विभिन्न टैक्स, पानी-बिजली के बिल आदि भी शामिल हैं। फिजिकल पजेशन देते समय सभी जन सुविधाएं देनी होंगी।

स्ट्रेक्चर में कमी आने पर 5 साल तक बिल्डर जिम्मेदार
इमारत के निर्माण और उसके स्ट्रेक्चर में कमियों के संबंध में हैंडओवर करने के पांच साल तक प्रमोटर जिम्मेदार होगा। कमियों को प्रमोटर अपने पैसों से सही कराएगा। साथ ही नुकसान का मुआवजा देने के लिए भी जिम्मेदार होगा। संबंधित विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी होगी कि वह नियमों का पालन कराए। जहां विकास प्राधिकरण नहीं हैं, वहां के डीएम को ये अधिकार होंगे। रेरा ने कहा है कि रेरा एक्ट 2016 और यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 व इसके रुल्स 2011 के तहत मॉडल बायलॉज बनाया जा रहा है। इसके अनुसार प्रमोटर और आवंटियों के बीच रेरा के एग्रीमेंट फोर सेल्स एंड लीज के तहत एक करार किया जाएगा, जिसका पालन दोनों पक्षों को करना होगा।

बाद में नहीं उठाएंगे क्वॉलिटी पर सवाल
निर्माण के दौरान परियोजनाओं की क्वॉलिटी की जांच रेरा की तकनीकी टीम करेगी। लिहाजा कंप्लीशन मिलने के बाद क्वॉलिटी को लेकर सवाल नहीं उठाया जाएगा। अगर आवंटियों की असोसिएशन अपनी जिम्मेदारियों को सही से नहीं निभाएगी तो उनका रजिस्ट्रेशन रद्द कराया जाएगा। असोसिएशन व प्रमोटर के बीच के विवादों को जल्द निपटाया जाएगा। इसके अनुसार अगर एओए परियोजना को टेकओवर नहीं करते हैं तो बिल्डर अतिरिक्त चार्ज लेकर मेंटीनेंस जारी रखेगा। बिल्डर इस मामले में शिकायत भी कर सकेगा।

टेकओवर होने तक बिल्डर जिम्मेदारी उठाएंगे
आवंटियों की असोसिएशन की ओर से परियोजना को टेकओवर करने तक प्रमोटर मेंटीनेंस के लिए जिम्मेदार होगा। परियोजना को कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के एक साल बाद भी अगर आवंटी अपनी असोसिएशन नहीं बना पाते हैं तो बिल्डर मेंटीनेंस चार्ज वसूल कर इमारत व सुविधाओं का रखरखाव करेंगे। एओए को डिप्टी रजिस्ट्रार या सब रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर्ड होना चाहिए। एओए के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रमोटर और और अपार्टमेंट ओनर्स की संयुक्त जिम्मेदारी होगी। अगर रजिस्स्ट्रेशन में बिल्डर सहयोग नहीं करता है तो उसे एक माह का नोटिस दिया जा सकेगा। बिल्डर तब भी सहयोग नहीं करता है तो भी रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।

बिल्डरों की भी हैं आवंटियों के खिलाफ शिकायतें
रेरा ने कहा है कि आवंटी उनके पास बिल्डर की शिकायत लेकर आते हैं और बिल्डर व उनकी संस्था क्रेडाई की ओर से कहा जाता है कि बायर एओए के गठन में सहयोग नहीं कर रहे हैं। बिल्डरों की शिकायत है कि एओए परियोजना को टेकओवर करने से पहले शर्त रखती है कि पूरे कैंपस को फिर से रिन्यूवल किया जाए। वह नया वॉटरपंप, नया जनरेटर, प्लंबिंग रिप्लेसमेंट जैसी मांगें रखते हैं, जिसके कारण मामला खिंचता है। बिल्डरों ने रेरा से मांग की थी कि कंप्लीशन के एक साल पूरा होने पर परियोजना एओए को हैंडओवर करने के लिए नियम बनाए जाएं।

ग्रेनो वेस्ट में आए दिन सामने आते हैं विवाद
सोसायटियों में आरडब्ल्यूए व अपार्टमेंट ओनर असोसिएशन के गठन को लेकर तमाम विवाद सामने आ रहे हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में इसको लेकर कई बार आंदोलन हो चुके हैं। मेंटिनेंस को लेकर बिल्डर पर आरोप लगता है, जबकि बिल्डर कहता है कि एओए बिल्डिंग को अपने अधिकार में नहीं ले रही है। बिल्डर पर भी आरोप लगते हैं कि एओए अथवा आरडब्ल्यूए के हवाले बिल्डिंग का रखरखाव नहीं किया जा रहा है। रेरा के पास भी इस तरह की शिकायतें पहुंचती हैं। इसको देखते हुए यूपी रेरा के सचिव अबरार अहमद ने एक गाइडलाइन तैयार की है।

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