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यूपी का वो स्कूल जहां लड़कियां लेती हैं शपथ, शादी करेंगे लेकिन 10वीं पढ़ने के बाद

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परदाद परदादी स्कूल

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 54 फीसदी लड़कियों की शादी 18 वर्ष से भी कम की उम्र में हो जाती है. वहीं बुलंदशहर का एक स्कूल लड़कियों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक कर रहा है ताकि किसी और की जिंदगी बर्बाद ना हो.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 16, 2020, 12:47 PM IST

बुलंद शहर. कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते लागू लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान उत्तर प्रदेश स्थित बुलंद शहर में एक पिता अपनी 13 साल की बेटी का बाल विवाह करने की योजना बना रहा था लेकिन एक फोन कॉल ने उसे सफल होने से रोक दिया. एक बच्ची की जिंदगी बर्बाद होते-होते बच गई. मामला 13 वर्षीय प्रीति से जुड़ा है. उनके पिता ने सोचा कि इस लॉकडाउन में वह प्रीति की शादी कर देंगे और किसी को खबर नहीं होगी. उनको लगा कि यह सबसे सही टाइम है. पांच लोगों के परिवार में अकेले कमाने वाले प्रीति के पिता ने सोचा कि वह बिना लोगों की नजर में आए यह काम आसानी से कर लेंगे. इतना ही नहीं. दूल्हे का परिवार प्रीति के घर तारीख पक्की करने भी आ गया था.

प्रीति ने बताया कि दूल्हे का परिवार शादी की तारीख तय करने आ गया था लेकिन बच्ची ने अपने टीचर को इस बारे में जानकारी देकर खुद को इस चक्कर से बचाया. लॉकडाउन के चलते वह अपने भाई के फोन से ऑनलाइन क्लास करती थी लेकिन वह भी किसी दिन हो पाता तो किसी दिन नहीं. जिस दिन उसकी शादी की तारीख पक्की हुई उसके अगले ही दिन उसने फोन लिया और अपने स्कूल टीचर को फोन किया. प्रीति ने टीचर को बताया, ‘वो लोग मेरी शादी करा रहे हैं. मैं शादी नहीं करना चाहती.’

टीचर ने घर वालों को मनाया
प्रीति की टीचर मधु शर्मा ने उसके परिजनों से बात की और उन्हें शादी ना करने के लिए मनाया. प्रीति अब फिर से ऑनलाइन क्लास कर रही है और फिलहाल उसके घर में शादी की बात बंद है. प्रीति, बुलंदशहर स्थित परदादा परदादी एजुकेशनल सोसाइटी इंटर कॉलेज में पढ़ने जाती हैं. यह स्कूल बुलंदशहर जिले में है जहां राष्ट्रीय औसत 940  की तुलना में 896 का चाइल्ड सेक्स रेशियो है. इसके साथ ही यह जिला लड़कियों के खराब स्वास्थ्य और कम साक्षरता दर के लिए भी बदनाम है.प्रीति ने 5 साल की उम्र में स्कूल जॉइन किया था. अंग्रेजी और मैथ्स के अलावा प्रीति को यहां यह भी सिखाया जाता है कि उसे अपने अधिकारों के लिए लड़ने की जरूरत है ना कि उसे अपनी किस्मत मान कर हार मान लेने की. इस स्कूल में लड़कियों को घर पर असहज प्रश्न पूछना सिखाया जाता है जैसे ‘मुझे अपने भाई की तुलना में कम भोजन क्यों दिया जाता है?’ या ‘मुझे पढ़ाई क्यों बंद करनी चाहिए?’

हम शादी करेंगे लेकिन…
बुलंदशहर का अनूप शहर कस्बे का वातावरण महिलाओं के लिए ठीक नहीं माना जाता है. गरीबी और अपराध के कारण यहां महिलाओं को भेदभाव, दुर्व्यवहार और हिंसा का सामना करना पड़ता है. व्यापक स्तर पर महिलाएं निरक्षर हैं. इतना ही नहीं कक्षा 8वीं के बाद यहां बच्चियों की पढ़ाई इतिश्री मान ली जाती है.

ये स्कूल अनोखा है. सुबह अपना असेंबली में लड़कियां प्लेज लेती हैं कि ‘हम शादी करेंगे, लेकिन दसवीं कक्षा पूरी करने के बाद.’ उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में, कम से कम 54% लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले ही हो जाती है.

यह रिपोर्ट मूलतः अंग्रेजी में अद्रिजा बोस ने लिखी है. इसे पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें How School Girls From Bulandshahr Stopped Child Marriages During the Pandemic



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