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खतरे की घंटी? नोएडा और मुंबई में ठीक हुए हेल्थकेयर वर्करों को फिर कोरोना

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हाइलाइट्स:

  • देश भर में तेजी से बढ़ रहा है कोरोना वायरस का संक्रमण
  • नोएडा और मुंबई से कोरोना महामारी को लेकर आई चौंकाने वाली खबर
  • नोएडा के दो और मुंबई के चार हेल्थकेयर वर्करों में दोबारा संक्रमण की पुष्टि

मुंबई
कोरोना वायरस (Coronavirus in India) का संक्रमण देश भर में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में नोएडा और मुंबई से कोरोना महामारी को लेकर चौंकाने वाली खबर आई है। यहां कोरोना वायरस के संक्रमण से एक बार ठीक होने के बाद दोबारा संक्रमित होने का मामला सामने आया है। इसमें नोएडा के दो और मुंबई के चार हेल्थकेयर वर्करों में दोबारा संक्रमण की पुष्टि हुई है। दिल्ली में सीएसआईआर के इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटिग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) की रिसर्च में पुन: संक्रमण का खुलासा हुआ है।

इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटिग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी), दिल्ली की ओर से पेश किए रिसर्च के अनुसार, नोएडा के एक अस्पताल के दो हेल्थकेयर वर्करों में दोबारा संक्रमण का मामला देश का पहला मामला हो सकता है। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, IGIB की टीम ने मुंबई के चार हेल्थकेयर वर्कर्स में तीन- मुंबई सेंट्रल के नायर हॉस्पिटल और हिंदुजा हॉस्पिटल, माहिम से दोबारा संक्रमण के मामले सामने आए हैं। मुंबई के यह परिणाम छह दिन पहले एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किए गए थे।

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16 हेल्थ केयर वर्करों के सैंपल्स की जांच
इंस्टिट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटरग्रेटिव बॉयलॉजी (IGIB) के निदेशक अनुराग अग्रवाल ने देश में कोरोना के दोबारा संक्रमण को साबित करते हुए कहा कि नोएडा के एक अस्पताल में दो मामलों के अलावा हमारी लैब ने छह अन्य सैंपलों में भिन्नता पाई है। इसमें चार मुंबई के हैं और दो अन्य दिल्ली के एक अस्पताल के हैं। कहा कि दोबारा संक्रमण की जांच के लिए IGIB की एक टीम ने अब तक देश भर से 16 हेल्थ केयर वर्करों के सैंपल्स की गहनता से जांच की। दो स्वाब सैंपलों में से एक पहले संक्रमण से और दूसरा दोबारा संक्रमण को दर्शाता है।

SARS-CoV2 वायरस के बीच नौ भिन्नताएं
नोएडा हेल्थ वर्कर के मामले में एक 25 वर्षीय पुरुष और एक 28 वर्षीय महिला के टेस्ट में दो SARS-CoV2 वायरस के बीच नौ भिन्नताएं देखी गईं जो उन्हें दोबारा संक्रमित करती हैं। एचसीडब्ल्यू ने 5 मई और 17 मई को पहली बार पीसीआर पॉजिटिव का टेस्ट किया। दूसरी बार क्रमशः 21 अगस्त और 5 सितंबर को किया था।

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एक अस्पताल में तो दूसरा मरीज घर में है आइसोलेट
गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, ग्रेटर नोएडा के डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि दोनों हेल्थ केयर वर्कर एक-दूसरे के संपर्क में आए थ। उन्होंने कहा कि जहां एक को हमारे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, वहीं दूसरा अपने घर में आइसोलेट है।

कैसे होता है दोबारा से संक्रमण
बताया कि व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना वायरस से हमेशा के लिए लड़ने के लिए तैयार नहीं हो पाती। और जैसे ही व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर पड़ती है तो पहले से शरीर में मौजूद वायरस शरीर पर हमला कर देता है। ऐसे में मरीज दोबारा से संक्रमित हो जाता है। जानकारों की माने तो कोरोना वायरस की बीमारी से पूरी तरह ठीक हो चुके 14 प्रतिशत लोगों में दोबारा से संक्रमण दिख सकता है।

तेलंगाना से आई रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
एक तरफ पूरी दुनिया कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन बनाने में जुटी है तो दूसरी तरफ हाल की कुछ खबरों ने बड़ा गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ये वैक्सीन कितने प्रभावशाली साबित हो पाएंगे? ऐसी ही खबरों की कड़ी में तेलंगाना से आई रिपोर्ट ने इस सवाल को और भी गहरा कर दिया है। तेलंगाना सरकार ने कहा है कि मंगलवार को राज्य में कोविड-19 के दो ऐसे मरीज पाए गए जिन्हें पहले भी कोरोना से संक्रमित हुए थे और इलाज के बाद ठीक हो गए थे।

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ऐंटीबॉडीज का खेल
तेलंगाना सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वो अतिरिक्त सतर्कता बरतें। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इतेला राजेंदर ने कहा, ‘इसकी कोई गारंटी नहीं है कि कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित होकर ठीक हो जाने के बाद दोबारा इस वायरस से संक्रमित नहीं होगा। पहली बार संक्रमण के बाद जिस व्यक्ति में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज विकसित नहीं हो पाती हैं, उन्हें दोबारा कोविड-19 महामारी होने का खतरा बना रहता है।’

दुनिया में 2.40 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित
ध्यान रहे कि चीन के वुहान से निकले कोरोना वायरस ने दुनियाभर में तबाही मचा रखी है। वायरस से पूरी दुनिया में अब तक 2.40 करोड़ से ज्यादा लोगों को संक्रमित हो चुके हैं। इस कारण 8.23 लाख से ज्यादा लोगों की जान भी जा चुकी है। वहीं, भारत में भी 32 लाख से ज्यादा लोग कोविड-19 महामारी की चपेट में आ गए हैं और यह संख्या हर दिन बढ़ती ही जा रही है। राहत की बात यह है कि देश में कोविड-19 महामारी से होने वाली मृत्यु की दर 2 प्रतिशत से भी कम है। फिर भी यहां करीब 60 हजार लोगों की जान जा चुकी है।

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