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कोरोना काल में बदली जिंदगी, महामारी खत्म होने के बाद भी लाइफ स्टाइल में होंगे आठ बड़े बदलाव

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कोरोना महामारी ने हमारे जीवन जीने के कई तरीकों को बदल दिया है. वास्तव में इस महामारी ने हमारी बहुत सारी छोटी-छोटी चीजों पर फुलस्टॉप लगा दिया या हमने उसे स्वीकार कर लिया है. जैसे ट्रैवल को ही लें. हम सोचते थे कि छुट्टियों में हमारी यात्राओं को सिर्फ बजट ही प्रभावित कर सकता है लेकिन अब आप कोरोना वायरस को भी दोष दे सकते हैं. घर से बाहर घूमने जाना, वीकेंड पर रेस्तरां का दौरा, शॉपिंग के लिए विभिन्न बाजारों में घूमना, थिएटर में मूवी देखने जैसे कई चीजें अब हमारे जीवन में बदल गई है.

यात्रा

कोरोनावायरस ने हमें अपने घर की चारदिवारी में सीमित कर दिया है. ईमानदारी से कहें तो रोड ट्रिप्स, ट्रेन जर्नी जिसका आनंद हम समय-समय पर उठाते रहे हैं पहले से बहुत कम हो गई है.

खाने की चीजें

आखिरी बार आप कब एक रेस्तरां में गए थे और स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया था? लॉकडाउन के बाद इसी महीने रेस्तरां खुले हैं लेकिन हम याद नहीं कर पाएंगे कि आखिरी बार खाने के लिए हम परिवार वालों के साथ कब गए थे. महामारी खत्म होने के बाद भी रेस्तरां कल्चर पर असर पड़ सकता है. लॉकडाउन के पहले चरण में कई लोगों ने अपनी पाक कला को दुरुस्त किया है और पसंदीदा व्यंजनों को घर पर ही बना डाला.

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घर पर बने भोजन को वरीयता दी

महामारी के शुरुआती दिनों निश्चित तौर पर वायरस के डर लोग ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने से बचते थे. ज्यादातर लोग सुरक्षा चिंताओं के कारण अभी भी रेस्तरां से भोजन ऑर्डर करने के लिए अनिच्छुक हैं. और जो लोग भी फूड आर्डर करते हैं वह एक बार संक्रमण के बारे में जरूर सोचते हैं.

मानवीय स्पर्श

गले मिलना और हाथ मिलाना ये सब अब अतीत की बातें हैं. खासकर इस महामारी के दौरान अकेले रहने वाले लोगों के लिए. जब यह सब खत्म होगा, तो भी हम आसानी से गले नहीं मिलेंगे.

थिएटर में मूवी देखना

कई लोगों ने लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन वेब सीरीज को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है. थिएटर बंद होने की वजह से अब मोबाइल-टीवी पर ही फिल्म देखने का विकल्प है. यह थिएटर में मूवी देखने जैसा बिलकुल नहीं है. सिनेमा हॉल में बंद होती लाइटें, तालियों की आवाज अब बस हमारे जेहन में मौजूद है.

पार्क में चहलकदमी

हरे-भरे पार्कों में टलहना स्वस्थ जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं. महानगरों में पार्क तो खुल गए हैं लेकिन अब पहले की तरह लोगों का जमावड़ा नहीं दिखता. वायरस के डर लोगों ने खुद को घरों तक सीमित किया है.

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चेहरे की मुस्कान

आजकल हमारे आसपास मुस्कुराते हुए लोगों को देखना मुश्किल है क्योंकि हर कोई मास्क पहने हुए है. वायरस से सुरक्षा के लिए मास्क अनिवार्य हो गया है और नतीजतन मुस्कुराहट बस गायब हो गई है.

तैयार होना

लॉकडाउन के दौरान घर में रहने के लिए बाध्य और जो लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं शायद वो तैयार होना भूल गए होंगे. अब तो घर में पहनने वाले कपड़े से ही काम चलाया जा रहा है.

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