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पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सरकार का प्लान, ‘भारत बुद्ध का देश’

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Edited By Bharat Malhotra | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

भारत बुद्ध की धरती

स्वाति माथुर, नई दिल्ली

देश में कई राज्य सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए धीरे-धीरे पर्यटकों के लिए खुल रहे हैं। ऐसे में पर्यटन मंत्रालय भी ‘देखो अपना देश’ कैम्पेन के जरिए इसमें सहयोग कर रहा है। देश-विदेश के बौद्ध पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए मंत्रालय भारत को बुद्ध के देश के तौर पर पेश कर रहा है।

चीन और अन्य करीबी बौद्ध देशों पर पर्यटन मंत्रालय की नजर है। पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने जोर देकर कहा कि हमें और बौद्ध पर्यटकों को भारत लाने की जरूरत है। पिछले हफ्ते उन्होंने टूर ऑपरेटर्स से पूछा था कि आखिर इतनी कम संख्या में बौद्ध टूरिस्ट भारत क्यों आते हैं।

बौद्ध पर्यटन को बढ़ाने के पीछे भारत का एक मकसद चीन पर निगाह रखना भी है। चीन ने बौद्ध लीडर्स को तैयार करने में काफी निवेश किया है। भारत पड़ोसी देशों में बौद्ध पर्यटन के जरिए भी अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है।

इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बौद्ध पर्यटन को बढ़ाने पर जोर दिया था। उन्होंने बौद्ध धर्म से जुड़े स्थानों तक बेहतर कनेक्टिविटी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। उन्होने यह भी कहा था कि उनकी सरकार ने कुशीनगर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय बनाने पर भी मुहर लगा दी है ताकि अधिक संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक वहां आसानी से पहुंच सकें।

पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बौद्ध धार्मिक ग्रंथ ‘मंगोलियन कंजूर’ के 108 खंड राष्ट्रपित राम नाथ कोविंद और मंगोलिया के राजदूत को दिया है। इस ग्रंथ को मंगोलिया में काफी पवित्र माना जाता है। पटेल ने इसके बाद भारत द्वारा बौद्ध धर्म से जुड़े इस महत्वपूर्ण ग्रंथ के सभी खंडों को छपवाने और मंगोलिया की सभी मोनेस्ट्री को मुहैया कराए जाने के वादे को दोहराया है।

टूरिज्म मंत्रालय ने बौद्ध धर्म से जुड़े स्थानों पर कई प्रमोशनल कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। इसमें बौद्ध धर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थानों जैसे- श्रावस्ती, सारनाथ, कुशीनगर और सांची आदि में चीनी समेत कई विदेशी भाषाओं में संकेत भी लगाए हैं। इन स्थानों पर बड़ी संख्या में बौद्ध टूरिस्ट आते हैं।

हालांकि देश में अभी कोरोना वायरस के मामले थमे नहीं हैं और सावधानी ही बचाव है लेकिन अर्थव्यवस्था की गति को बनाए रखना भी अहम है। इसमें पर्यटन एक अहम सेक्टर है। उत्तराखंड में पर्यटकों को एक सर्टिफिकेट देना होता है जिसमें वह खुद को कोरोना नेगेटिव होने की पुष्टि करते हैं। जिन पर्यटकों के पास यह सर्टिफिकेट होता है उन्हें क्वॉरनटीन में नहीं रहना पड़ता। जिन ग्राहकों की जांच नहीं हुई है होटल प्रशासन उनका RT-PCR टेस्ट करेंगे। पर्यटक अपने आने के सात दिन बाद ही होटल छोड़ सकते हैं। इसके अलावा डेस्टिनेशन वेडिंग की इजाजत है लेकिन मेहमान सिर्फ शादी की जगह पर ही जा सकते हैं।

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