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आत्मनिर्भर भारत प्रतियोगिता का विजेता बना बिहार का यह इंजीनियर, कैप्शन प्लस ऐप को मिला पहला स्थान

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आत्मनिर्भर भारत प्रतियोगिता जीतने वाले बिहार के इंजीनियर अनुराग

Pradhanmantri Aatm Nirbhar Pratiyogita: अनुराग और उनके दोस्तों को वर्चुअल तरीके से ही सम्मानित किया जाएगा. 20 लाख रुपए का कैश अवार्ड दिया जाएगा सर्टिफिकेट और ट्रॉफी अलग से दी जाएगी.

पटना. कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो! इसी कहावत की तर्ज पर बिहार के बेगूसराय (Begusarai) के रहने वाले अनुराग ने आत्मनिर्भर भारत प्रतियोगिता (Aatm Nirbhar Bharat) में भाग लिया और विजेता भी हुए. पूरे भारत में नंबर वन बन गए. पेशे से अनुराग आईटी इंजीनियर (IT Engineer) हैं. इनकी पढ़ाई पटना और दिल्ली में हुई. अनुराग की इस सफलता से परिवार के लोग काफी खुश हैं.

अनुराग कुमार आईटी इंजीनियर हैं. आईटी कंपनी में काम करते हुए इन्होंने दो दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐप बनाया. ऐप का नाम कैप्शन प्लस रखा. पूंजी कम होने की वजह से अनुराग ने इसे गूगल प्ले स्टोर पर लोड तो कर दिया, लेकिन इसका प्रमोशन नहीं कर पाए. हालांकि, धीरे-धीरे यह ऐप लोगों को पसंद आने लगा और एक समय ऐसा आया कि इसके 20 लाख यूजर हो गए प्रतिदिन लाखों लोग इस ऐप का प्रयोग करते हैं.

सोशल मीडिया में कैप्शन लिखने में मदद करता है ऐप
इसकी खासियत यह है यह सोशल मीडिया पर कैप्शन बनाने में मदद करता है. यदि आप अपनी फोटो को सोशल मीडिया पर लोड करते हैं और चाहते हैं कि आपके इस फोटो की कहानी या कैप्शन बहुत दिलचस्प हो तो यह ऐप आपकी मदद करेगा. कैप्शन लिखने में जो आप घंटों समय लगाते थे. यह इस काम को मिनटों में कर देगा. और यही वजह रही कि अनुराग का कैप्शन प्लस लोगों को भाने लगा और यह ऐप सबका चहेता बन गया.8 हजार ऐप्स को पछाड़ को विजेता बना कैप्शन प्लस

कोरोना संकट में के दौरान प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की मुहिम चलाई. केंद्र की आईटी विभाग ने आत्मनिर्भर भारत प्रतियोगिता चलाई जिसमें देश के आठ हजार ऐप बनाने वाले इंजीनियरों ने भाग लिया. इसमें बिहार के बेगूसराय के रहने वाले अनुराग ने भी अपने ऐप कैप्शन प्लस को डाला. तीन राउंड के बाद कैप्शन प्लस को विजेता घोषित किया गया. अब अनुराग और उनके दोस्तों को वर्चुअल तरीके से ही सम्मानित किया जाएगा. 20 लाख रुपए का कैश अवार्ड दिया जाएगा सर्टिफिकेट और ट्रॉफी अलग से दी जाएगी.

मां डांटा करती थी, बेटे ने सफलता पायी
अनुराग के पिता राममूर्ति सिंह बेटे की इस सफलता से काफी खुश हैं. राममूर्ति सिंह कहते हैं कि उन्होंने अब तक बेटे को जितना पढ़ाया आज वह सफल हो गया. अनुराग के पिता यह भी कहते हैं अनुराग लगातार अपने स्कूल में टॉप करता रहा है. यह सफलता उनके लिए काफी मायने रखती है. वही मां रीता सिंह कहती हैं कि जब अनुराग कंप्यूटर पर बैठा होता था तो उसे डांटा करती थी. कहती थी दिनभर कंप्यूटर पर बैठकर गेम खेल रहा है लेकिन आज जब बेटे ने सफलता पाई तो ऐसा लग रहा है कि बेटा गेम नहीं खेल रहा था. बेटा देश की सेवा कर रहा था और आत्मनिर्भर बन रहा था.



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