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सतर्कता: महिलाओं के विरुद्ध अपराध की जांच समय पर पूरी हो इसलिए भेज रहे अलर्ट मैसेज, 60 दिन में चालान – Dainik Bhaskar

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रायपुर3 घंटे पहले

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  • जांच अधिकारी और थाना प्रभारी से एसपी तक तीन स्टेप में अलर्ट

मनोज व्यास | महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराध की जांच में तेजी और समय पर चालान पेश करने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस ने मैसेज अलर्ट सिस्टम तैयार किया है। इसके अंतर्गत दुष्कर्म के मामलों में तीन स्तर पर अलर्ट जारी किया जाता है, जिससे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक हर हाल में 60 दिनों के भीतर अदालत में चालान पेश किया जा सके। इसमें देर होने पर एसपी और आईजी को भी सूचना दी जाती है, जिससे संबंधित जांच अधिकारी व थानेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के मामलों में 60 दिन के भीतर चालान पेश करने के लिए निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय पर जांच पूरी कर पुलिस चालान पेश करे, इसलिए सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के अंतर्गत अलर्ट दिया जाता है। पहले चरण में एफआईआर दर्ज होने के 45 दिन में जांच अधिकारी व थाना प्रभारी को अलर्ट मैसेज दिया जाता है, जिससे वे चालान पेश कर सकें। इसके बाद भी चालान तैयार नहीं होने पर 52 दिन में जांच अधिकारी व थाना प्रभारी के साथ सीएसपी, एसडीओपी या डीएसपी को अलर्ट मैसेज भेजा जाता है। इस टाइमलाइन में भी चालान जमा नहीं होने पर एफआईआर के 58वें दिन में जांच अधिकारी, थाना प्रभारी और सीएसपी-एसडीओपी के अलावा एडिशनल एसपी, इन्वेस्टिगेशन यूनिट फाॅर क्राइम अगेंस्ट वुमन के प्रभारी और एसपी को अलर्ट किया जाता है। इसके बाद आईजी को सूचना दी जाती है।
केस दर्ज होने के बाद निगरानी शुरू : थानों में ऑनलाइन एफआईआर दर्ज किए जा रहे हैं। सीसीटीएनएस शाखा के प्रभारी चौधरी एसएन सिंह के मुताबिक दुष्कर्म की एफआईआर के बाद हर स्टेप की निगरानी शुरू हो जाती है। जांच अधिकारी से लेकर अफसरों को निश्चित दिनों में अलर्ट जारी किया जाता है।

गंभीर मामलों की जांच में भी मदद
महिलाओं के विरुद्ध होने वाले सभी तरह के अपराधों की पुलिस मुख्यालय से सीधी निगरानी की जा रही है। इसके लिए सीआईडी के अंतर्गत महिला सेल सभी केस पर नजर रखता है। चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों में भी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। जो भी गंभीर किस्म के अपराध हैं, उसकी जांच में मदद की जा रही है।

“थानों को डिजिटाइज करने के अलावा मॉनिटरिंग का सिस्टम तैयार किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक समय पर चालान पेश हो, इसलिए जांच अधिकारी से एसपी व आईजी स्तर पर अलर्ट मैसेज भेजा जाता है, जिससे इन्वेस्टिगेशन समय पर हो और पीड़ित को न्याय मिले।”
-आरके विज, प्रमुख सीसीटीएनएस

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