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रूस की कोरोना वैक्सीन को लेकर WHO को संदेह क्यों, कही ये बात – BBC Hindi

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंगलवार को रूस की वैक्सीन को लेकर संदेह जताया है. रूस अक्टूबर महीने से कोरोना वायरस की वैक्सीन का उत्पादन शुरू करने जा रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि वैक्सीन उत्पादन के लिए कई गाइडलाइन्स बनाई गई हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर से यूएन प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पूछा गया कि अगर किसी वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल किए बगैर ही उसके उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाता है तो क्या संगठन इसे ख़तरनाक मानेगा?

रूस के स्वास्थ्य मंत्री ने शनिवार को कहा था कि उनका देश अक्टूबर महीने से कोविड-19 के ख़िलाफ़ बड़े स्तर पर वैक्सीन कैंपेन शुरू करने की तैयारी कर रहा है.
रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिख़ाइल मुराश्को ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा था कि वैक्सीन की कोई फीस नहीं ली जाएगी और सबसे पहले इसे डॉक्टर्स और अध्यापकों को दिया जाएगा.

रूसी स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि उत्पादन के साथ-साथ वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल भी जारी रहेगा और इसे बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर ने कहा, ‘’जब भी ऐसी ख़बरें आएं या ऐसे क़दम उठाए जाएं तो हमें सावधान रहना होगा. ऐसी ख़बरों के तथ्यों की जांच सतर्कता के साथ की जानी चाहिए.’’

क्रिस्टियन लिंडमियर ने कहा, ‘’कई बार ऐसा होता है कि कुछ शोधकर्ता दावा करते हैं कि उन्होंने कोई खोज कर ली है जो कि वाक़ई बहुत अच्छी ख़बर होती है. लेकिन कुछ खोजने या वैक्सीन के असरदार होने के संकेत मिलने और क्लीनिकल ट्रायल के सभी चरणों से गुजरने में बहुत बड़ा फ़र्क़ होता है. हमने आधिकारिक तौर पर ऐसा कुछ नहीं देखा है. अगर आधिकारिक तौर पर कुछ होता तो यूरोप के हमारे दफ़्तर के सहयोगी ज़रूर इस पर ध्यान देते.’’

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता ने कहा, ‘’एक सुरक्षित वैक्सीन बनाने को लेकर कई नियम बनाए गए हैं और इसे लेकर गाइडलाइन्स भी हैं. इनका पालन किया जाना ज़रूरी है ताकि हम जान सकें कि वैक्सीन या कोई भी इलाज किस पर असरदार है और किस बीमारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में मदद कर सकती है.’’

उन्होंने कहा, गाइडलाइन का पालन करने से हमें ये भी पता चलता है कि क्या किसी इलाज या वैक्सीन के साइड इफेक्ट हैं या फिर कहीं इससे फायदे के बजाय नुकसान तो ज्यादा नहीं हो रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी वेबसाइट पर क्लीनिकल ट्रायल से गुजर रहीं 25 वैक्सीन को सूचीबद्ध किया है जबकि 139 वैक्सीन अभी प्री-क्लीनिकल स्टेज में हैं.



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